चाईबासा: चाईबासा के जुबली तालाब स्थित कैफेटेरिया में मुंडा मानकी संघ के (बाढ़ पीढ़) अध्यक्ष गणेश पाठ पिंगुवा की अध्यक्षता में झारखण्ड सरकार द्वारा पारित पेसा कानून को लेकर एक विशेष प्रेस वार्ता आयोजित की गई। इस दौरान मानकी मुंडा संघ, कोल्हान–पोड़ाहाट ने पंचायत उपबन्ध (अनुसूचित क्षेत्र विस्तार) झारखण्ड नियमावली–2025 को असंवैधानिक बताया।
संघ के सदस्यों ने कहा कि यह नियमावली संविधान और केन्द्रीय कानून पेसा अधिनियम, 1996 के प्रावधानों का उल्लंघन करती है। उन्होंने बताया कि संविधान के अनुच्छेद 243(म) के अनुसार संविधान के भाग–9 (पंचायत) के प्रावधान अनुसूचित एवं जनजातीय क्षेत्रों में सीधे लागू नहीं किए जा सकते। इसके बावजूद झारखण्ड सरकार पंचायती राज अधिनियम, 2001 के माध्यम से इन क्षेत्रों में पंचायत व्यवस्था लागू करने का प्रयास कर रही है, जो संविधान के विरुद्ध है।
संघ के अनुसार वर्ष 1995 में आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट और पटना हाईकोर्ट ने अपने फैसलों में स्पष्ट किया था कि अनुसूचित क्षेत्रों में पंचायत कानून का विस्तार नहीं किया जा सकता। इसके बावजूद न्यायालयों के आदेशों की अनदेखी कर यह नियमावली लाई जा रही है।
सदस्यों ने यह भी कहा कि वर्ष 1977 से 2007 तक सम्पूर्ण झारखण्ड राज्य अनुसूचित क्षेत्र के रूप में सूचीबद्ध था। वर्ष 2007 में अनुसूचित क्षेत्र का परिसीमन किया गया। ऐसे में वर्ष 2001 में पारित झारखण्ड पंचायत राज अधिनियम को भी संविधान के प्रावधानों के विपरीत बताया गया।
संघ का आरोप है कि पेसा अधिनियम, 1996 के तहत कानून या नियम बनाने का अधिकार राज्य विधानमंडल को है, न कि राज्य सरकार के पंचायती राज विभाग को। इसके बावजूद कार्यपालिका स्तर पर नियमावली बनाकर लागू करने का प्रयास किया जा रहा है, जो कानूनन गलत है।
मानकी मुंडा संघ ने झारखण्ड सरकार से मांग की है कि संविधान, न्यायालयों के फैसलों और पेसा कानून का सम्मान करते हुए इस प्रस्तावित नियमावली को तत्काल वापस लिया जाए।
प्रेस वार्ता में संघ के कई पदाधिकारी और सामाजिक प्रतिनिधि उपस्थित थे, जिनमें गणेश पाठ पिंगुवा (बाढ़ पीढ़), अध्यक्ष, मानकी मुंडा संघ, कृष्ण सामड, मानकी चैनपुर पीढ़, चक्रधरपुर, सुभाष बारी, समाजसेवी, सिंबिया, बिरसा मुंडा, मानकी मुंडा संघ, सोनुवा, सुरेश सोय, मानकी सदन पीढ़, सरायकेला तथा नसीम चांपिया, कोल्हान संयोजक, आदिवासी बुद्धिजीवी मंच प्रमुख रूप से शामिल थे।

