जमशेदपुर। मंगलवार को आनंद मार्ग प्रचारक संघ की ओर से गदरा एवं पटमदा के देहात क्षेत्र में भव्य कीर्तन महासभा का आयोजन किया गया, जिसमें “बाबा नाम केवलम्” अखंड कीर्तन का सामूहिक गायन हुआ। बड़ी संख्या में साधक और श्रद्धालु इस आध्यात्मिक आयोजन में शामिल हुए और भक्ति व ध्यान के वातावरण में स्वयं को भावविभोर अनुभव किया।
महासभा में आनंद मार्ग के वरिष्ठ प्रचारक सुनील आनंद ने कहा कि कीर्तन मन के तमोगुण के प्रभाव को कम कर उसे निर्मल और शुद्ध बनाता है। उन्होंने बताया कि अष्टाक्षरी सिद्ध महामंत्र “बाबा नाम केवलम्” की स्थापना सद्गुरु श्री आनंदमूर्ति जी ने 8 अक्टूबर 1970 को झारखंड के लातेहार जिले के अमझरिया में की थी। यह मंत्र सार्वभौमिक प्रेम का प्रतीक है और विश्वभर में आध्यात्मिक साधकों द्वारा अपनाया जाता है।
कीर्तन समाप्ति के पश्चात अपने आध्यात्मिक उद्बोधन में सुनील आनंद ने कहा कि ईश्वर प्राप्ति का सबसे सुगम और प्रभावी साधन कीर्तन है। यह भक्ति और ध्यान का ऐसा माध्यम है, जिससे साधक ईश्वर के साथ गहरा संवाद स्थापित करता है। कीर्तन से मन संयमित होता है, इंद्रिय विषयों से वैराग्य प्राप्त होता है और व्यक्ति अविरल ध्यान की अवस्था में पहुंचता है।
उन्होंने कहा कि कीर्तन हमें अशांति, तनाव और चिंता से मुक्त कर मानसिक व आत्मिक स्वतंत्रता का अनुभव कराता है। यह प्रेम, सहानुभूति और एकाग्रता को विकसित कर जीवन को सुख, शांति और आनंद से भर देता है। कीर्तन के माध्यम से व्यक्ति न केवल स्वयं को शुद्ध करता है, बल्कि समस्त जगत के साथ सामंजस्य और ईश्वर के प्रति अनन्य भाव भी विकसित करता है।

