जमशेदपुर।जमशेदपुर की 86 बस्तियों को उनके वाजिब अधिकार दिलाने की मांग को लेकर शनिवार को सीतारामडेरा स्थित कार्यालय में एक अहम प्रेस वार्ता आयोजित की गई। प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए युवा समाजसेवी सुनील सिंह चौहान और वरिष्ठ नेता मनोज सिंह उज्जैन ने बस्तीवासियों के भविष्य को लेकर सरकार और प्रशासन को कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने साफ कहा कि यदि वर्षों से लंबित मालिकाना हक का मसला जल्द नहीं सुलझाया गया तो यह आंदोलन उग्र रूप लेगा।
सुनील सिंह चौहान ने कहा कि जमशेदपुर की 86 बस्तियों में लाखों लोग दशकों से रह रहे हैं, बावजूद इसके आज भी उन्हें अपने ही घर में अतिक्रमणकारी की तरह देखा जाता है। मालिकाना हक के अभाव में न तो बस्तीवासियों को सरकारी योजनाओं का पूरा लाभ मिल पाता है और न ही वे बैंक से होम लोन जैसी सुविधाएं ले पाते हैं। बुनियादी सुविधाओं का विकास भी इसी कारण अधर में लटका हुआ है।
मनोज सिंह उज्जैन ने कहा कि लीज एरिया और जमीन के तकनीकी विवादों ने बस्तीवासियों की जिंदगी को असुरक्षा के साये में डाल दिया है। हर समय बेदखली का डर लोगों के मन में बना रहता है, जो न सिर्फ अमानवीय है बल्कि संविधान प्रदत्त अधिकारों का भी उल्लंघन है।
नेताओं ने समाधान के तौर पर ओडिशा सरकार के ‘जगा मिशन’ मॉडल को जमशेदपुर में लागू करने की मांग की। उन्होंने कहा कि जिस तरह ओडिशा में लाखों स्लम और बस्तीवासियों को जमीन का पट्टा और कानूनी मालिकाना हक दिया गया, उसी तर्ज पर जमशेदपुर की 86 बस्तियों को भी सीधे मालिकाना हक दिया जाना चाहिए। इसके लिए जटिल नियमों और प्रक्रियाओं को खत्म कर सरल और स्पष्ट कानून बनाया जाए।
प्रेस वार्ता के दौरान दोनों नेताओं ने संयुक्त रूप से चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार ने जल्द ही जगा मिशन की तर्ज पर कोई ठोस नीति नहीं बनाई, तो 86 बस्तियों का हर निवासी सड़कों पर उतरकर आंदोलन करेगा। यह लड़ाई केवल जमीन की नहीं, बल्कि घर और आत्मसम्मान की है, और इसे किसी भी कीमत पर छोड़ा नहीं जाएगा।
प्रेस वार्ता में वरिष्ठ समाजसेवी भोला सिंह, धीरेन्द्र सिंह, साकेत सिंह, शंकर राव, वरुण अग्रवाल, रोशन सिंह, अभिषेक सिंह, सत्री शर्मा, कृष बिहारी, संजय सिंह, निखित अग्रवाल, शुभम चौधरी सहित सैकड़ों कार्यकर्ता मौजूद रहे।

