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Mon. Jan 12th, 2026

हजारीबाग की “अभेद्य” जेपी कारा से तीन आजीवन कारावास के कैदी फरार, जेल सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल

हजारीबाग।हजारीबाग स्थित लोकनायक जयप्रकाश नारायण केंद्रीय कारा, जिसे राज्य की सबसे सुरक्षित जेलों में गिना जाता है, से तीन आजीवन कारावास की सजा काट रहे कैदियों के फरार होने की घटना ने जेल प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। इस अप्रत्याशित घटना के बाद न सिर्फ जेल महकमे में हड़कंप मचा है, बल्कि आम लोगों के बीच भी तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, धनबाद जिले के रहने वाले ये तीनों कैदी उम्रकैद की सजा काट रहे थे। नियमित प्रक्रिया के तहत जब कैदियों को बैरक से बाहर निकालकर गिनती कराई जा रही थी, उसी दौरान तीनों कैदी अचानक लापता हो गए। शुरुआत में जेलकर्मियों को लगा कि कैदी परिसर के भीतर ही कहीं होंगे, इसलिए आंतरिक स्तर पर खोजबीन शुरू की गई। काफी देर तक तलाश के बावजूद जब कोई सुराग नहीं मिला, तब जेल प्रशासन को कैदियों के फरार होने का अहसास हुआ और पूरे परिसर में अफरा-तफरी मच गई।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जेपी कारा को अत्याधुनिक सुरक्षा व्यवस्था से लैस बताया जाता रहा है। यहां पांच स्तरीय सुरक्षा घेरा, हर कोने में सीसीटीवी कैमरे, ऊंची दीवारें और प्रत्येक प्रवेश व निकास द्वार पर सशस्त्र बलों की तैनाती है। इसके बावजूद तीन कैदियों का इस तरह गायब हो जाना न केवल सुरक्षा में बड़ी चूक की ओर इशारा करता है, बल्कि जेल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े करता है।

घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस और जेल प्रशासन हरकत में आ गया है। फरार कैदियों की तलाश के लिए संभावित ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है और आसपास के जिलों को भी अलर्ट किया गया है। साथ ही जेल के भीतर सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा शुरू कर दी गई है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इतनी कड़ी निगरानी के बावजूद चूक कहां हुई।

इस घटना ने जहां एक ओर जेल की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, वहीं दूसरी ओर लोगों के बीच यह मामला हैरानी और चर्चा का विषय बन गया है। अब सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि फरार कैदियों को कब तक पकड़ लिया जाता है और इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार लोगों पर क्या कार्रवाई होती है।

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