जमशेदपुर : आनंद मार्ग प्रचारक संघ द्वारा “डायन प्रथा और नहीं” अभियान के तहत शहर के विभिन्न इलाकों में लोगों को जागरूक किया जा रहा है। मंगलवार को संघ के सुनील आनंद ने कहा कि झारखंड को बने 25 वर्ष हो गए, परंतु सामाजिक रूप से यह अभी भी अर्ध विकसित है। आज भी लगभग हर जिले में डायन के संदेह में महिलाओं की हत्या होती है, जो बेहद शर्मनाक और दुखद है। उन्होंने कहा कि मंत्र और तंत्र मानव कल्याण के लिए हैं, किसी को नुकसान पहुँचाने के लिए नहीं। डायन प्रथा, बलि प्रथा और ओझा-गुनी जैसी कुरीतियाँ अंधविश्वास पर आधारित हैं, जिनका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं।
सुनील आनंद ने कहा कि इन कुप्रथाओं को समाप्त करने के लिए समाज में मानसिक शक्ति और जागरूकता बढ़ानी होगी। शिक्षा प्रणाली में अंधविश्वास के विरुद्ध वैज्ञानिक और आध्यात्मिक तथ्य शामिल किए जाने चाहिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि कठिनाइयाँ कर्म के कारण होती हैं, ओझा-गुनी के कारण नहीं। बीमार पड़ने या साँप-बिच्छू काटने पर झाड़-फूंक नहीं, अस्पताल जाना चाहिए।
उन्होंने लोगों से भक्ति, कीर्तन और सकारात्मक चिंतन के माध्यम से मन को मजबूत करने का आह्वान किया। कहा कि जब आत्मबल बढ़ेगा, तो कोई भी व्यक्ति अंधविश्वास के सहारे निर्दोषों को डायन बताकर अत्याचार नहीं कर सकेगा।

