चाईबासा। पश्चिम सिंहभूम जिले के तांतनगर प्रखंड के बाटीगुटू में करोड़ों रुपये की लागत से निर्मित फार्मासिस्ट कॉलेज का भवन पिछले तीन वर्षों से यूं ही बंद पड़ा है। पूरी तरह तैयार इमारत धूल फांक रही है, लेकिन प्रशासन की उदासीनता के कारण आज तक इसे छात्रों के लिए शुरू नहीं किया जा सका है। इस गंभीर मामले को उठाते हुए एंटी करप्शन ऑफ इंडिया के झारखंड प्रदेश अध्यक्ष धी. रामहरि पेरियार ने शनिवार को उपायुक्त चंदन कुमार को ज्ञापन सौंपकर तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
पेरियार का कहना है कि यह सिर्फ एक भवन का मुद्दा नहीं, बल्कि हजारों युवाओं के भविष्य और उनके संवैधानिक अधिकारों की अनदेखी का प्रतीक है। उनका आरोप है कि प्रशासनिक लापरवाही और भ्रष्टाचार के कारण तैयार भवन भी अभी तक उपयोग में नहीं लाया जा सका है, जिससे लोक निधि की भारी बर्बादी हो रही है। उन्होंने अनुच्छेद 21 और 21A (जीवन और शिक्षा का अधिकार), तथा अनुच्छेद 14 और 16 (समानता व रोजगार के अवसर) का हवाला देते हुए कहा कि यह स्थिति संवैधानिक व्यवस्था का भी उल्लंघन है।
पेरियार ने आरोप लगाया कि अधिकारियों की उदासीनता के पीछे “40 प्रतिशत कमीशन” का भ्रष्ट खेल छिपा हुआ है, जो कॉलेज संचालन में सबसे बड़ी बाधा बना हुआ है। यह न केवल जनहित के खिलाफ है, बल्कि सीधे-सीधे अपराध की श्रेणी में आता है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि कॉलेज संचालन अविलंब शुरू नहीं किया गया, तो यह मामला जनहित याचिका के रूप में झारखंड हाई कोर्ट में दायर किया जाएगा और लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ वित्तीय व विभागीय कार्रवाई की मांग की जाएगी।
उन्होंने चेतावनी दी कि अब समय आ गया है जब प्रशासन को जवाबदेह बनाया जाए। कॉलेज का संचालन शुरू कर युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। यह मामला कोल्हान क्षेत्र के युवाओं के अधिकारों और संभावनाओं के साथ गंभीर खिलवाड़ का प्रतीक बन चुका है। प्रशासन की यह उदासीनता जनसाधारण के भरोसे को ठेस पहुंचाती है और जनता की आंखों में धूल झोंकने के बराबर है।

