जमशेदपुर। चतुर्थ बाल मेला 2025 का माहौल गुरुवार को उस समय और भी खुशनुमा हो गया, जब प्रसिद्ध युवा कलाकार पैक्स सोय मुर्मू ने टाटा स्टील में कार्यरत कुमारी खुशी की मुस्कान को कागज़ पर ऐसे उतारा, मानो भावनाएं शब्द नहीं, रेखाएं बोल रही हों। पैक्स के सामने शांत भाव से बैठी खुशी के चेहरे पर जो सहज, निश्छल आभा थी, वही आभा हू-ब-हू उनके स्केच में उतर आई।
पहली नज़र में कोई भी यही कह उठता—यह सिर्फ स्केच नहीं, एक पल का अमर चित्रण है।
पैक्स की उंगलियां जैसे कागज़ पर दौड़ नहीं रही थीं, बल्कि एक अदृश्य लय में भावों को आकार दे रही थीं। श्याम-श्वेत आवरण में न कोई ओवरलैपिंग, न कोई मिटावट—हर स्ट्रोक सटीक, हर छाया संतुलित। दूसरा लेयर जैसे चित्र में जान फूँक रहा था। रंग चढ़ते ही स्केच मुस्कुराने लगा, बिल्कुल उसी तरह जैसे खुशी मुस्कुरा रही थीं। अपना चित्र पूरा होते ही वे अपने आप को रोक न सकीं और अनायास बोल उठीं—“वाह!”
बाल मेले में कला का यह दृश्य अकेला नहीं था। अलग-अलग शहरों से आए प्रतिभाशाली कलाकार अपनी कूची और कैनवास के साथ बच्चों की कल्पनाओं को रंग दे रहे थे। पूरे आयोजन को दिशा दे रहे थे रांची के प्रतिष्ठित चित्रकार-शिल्पकार दीपांकर कर्मकार, जिन्होंने एक दिन पहले ही राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार को उनका हस्तनिर्मित पोट्रैट भेंट किया था। राज्यपाल ने उस कलात्मक सौगात को विशेष रूप से सराहा और अपने साथ ले गए।
मेले में प्रसिद्ध चित्रकार मुक्ता गुप्ता की उपस्थिति ने भी कला प्रेमियों का उत्साह बढ़ाया। इसी माह उन्होंने चार दिवसीय राष्ट्रीय चित्रकला कार्यशाला आयोजित की थी, जिसमें 25 ख्याति प्राप्त कलाकार जुटे थे।
बाल मेला बच्चों की दुनिया को रंगने का मंच था, पर इस बार कलाकारों की रचनाएं भी बच्चों की खुशी से सराबोर होती दिखीं। खुशी की मुस्कान कैनवास पर उतर चुकी है—लेकिन पैक्स के हुनर ने उस मुस्कान में जो स्थायित्व दिया है, वह इस मेले की सबसे यादगार तस्वीर बन गया।

