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हेमंत सोरेन के खिलाफ मैदान में उतरे दुलाल भुईयां, बोले – अहंकार में डूबकर कर रहे आदिवासियों का अपमान

जमशेदपुर। झारखंड मजदूर यूनियन के वरिष्ठ नेता और झारखंड आंदोलन के अग्रणी रहे दुलाल भुईयां अब खुलकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के खिलाफ मैदान में आ गए हैं। सोमवार को छाया नगर स्थित अपने कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत करते हुए दुलाल भुईयां ने हेमंत सोरेन पर तीखा प्रहार किया और उन्हें अहंकारी बताते हुए आरोप लगाया कि वे आदिवासियों का अपमान कर रहे हैं।

दुलाल भुईयां ने कहा कि हेमंत सोरेन ने हाल ही में पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन के पुत्र को “बेल, गोरू, काड़ा” कहकर संबोधित किया, जो बेहद निंदनीय है। उन्होंने कहा कि यह टिप्पणी न केवल चंपई सोरेन बल्कि पूरे झारखंड आंदोलन की आत्मा का अपमान है। दुलाल भुईयां ने कहा, “हेमंत सोरेन को झारखंड आंदोलन की जानकारी नहीं है। जब बिहार के समय झारखंड राज्य की मांग को लेकर आंदोलन चल रहा था, उस समय झारखंड मुक्ति मोर्चा दो भागों में बंट गया था — एक पक्ष कृष्णा मार्डी का और दूसरा शिबू सोरेन का। उस समय चंपई सोरेन, शिबू सोरेन के साथ कंधे से कंधा मिलाकर आंदोलन चला रहे थे। मैं, रामदास सोरेन और अन्य साथियों ने भी उसी संघर्ष में भाग लिया था। हमने अपने खून-पसीने से इस राज्य को बनाया है।”

उन्होंने आगे कहा कि उस दौर में हेमंत सोरेन केवल 6-7 साल के बच्चे थे, जिन्हें आंदोलन की गहराई और उसकी पीड़ा का अंदाजा नहीं हो सकता। आज वे अपने पिता दिशम गुरु शिबू सोरेन के नाम पर राजनीति कर रहे हैं और उसी आंदोलन से जन्मे लोगों को अपमानित कर रहे हैं। दुलाल भुईयां ने कहा, “हेमंत अपने पिता के आंदोलन से सींचे खेत की फसल काट रहे हैं। वे अहंकार में चूर हैं और आदिवासियों का अपमान कर रहे हैं, जिसे मैं कभी बर्दाश्त नहीं कर सकता।”

भुईयां ने स्पष्ट किया कि वे अब भी झारखंड मुक्ति मोर्चा के सदस्य हैं और कोई उन्हें पार्टी से निकाल नहीं सकता। उन्होंने घाटशिला क्षेत्र के यूनियन नेताओं और जनता से अपील की कि वे पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन के पुत्र बाबूलाल सोरेन को खुला समर्थन दें और हेमंत सोरेन के “अहंकार को चूर” करें।

उन्होंने कुणाल सारंगी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें चंपई सोरेन पर टिप्पणी करने या उनके विरुद्ध बोलने का कोई अधिकार नहीं है। “वह अंग्रेजी पढ़ लिए हैं तो इसका मतलब यह नहीं कि वे झारखंड आंदोलन के इतिहास को जान गए। आंदोलन की मिट्टी में जिसने पसीना बहाया है, वही उसका सच्चा वारिस है,” उन्होंने कहा।

राजनीतिक हलकों में दुलाल भुईयां का यह बयान घाटशिला उपचुनाव के संदर्भ में बड़ा माना जा रहा है। जहां एक ओर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पार्टी के प्रचार अभियान का नेतृत्व कर रहे हैं, वहीं दुलाल भुईयां जैसे पुराने आंदोलनकारी का खुलकर विरोध में उतरना झामुमो के लिए झटका साबित हो सकता है। झारखंड की राजनीति में यह बयान हेमंत और चंपई गुट के बीच बढ़ते मतभेद को और गहराई दे सकता है।

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