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सिंहभूम चैम्बर की टाटा स्टील प्रोक्योरमेंट विभाग के साथ आयोजित होने वाले श्रृंखलागत बैठक का हुआ आयोजन

चैम्बर ने प्रमुखता से वेंडरों की समस्याओं को प्रोक्योरमेंट विभाग के उच्च अधिकारियों के समक्ष उठाया*

सिंहभूम चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री की टाटा स्टील के साथ आयोजित होने वाले श्रृंखलागत त्रैमासिक बैठक का आयोजन गुरूवार, 6 नवंबर को चैम्बर भवन में आयोजित किया गया। बैठक में प्रोक्योरमेंट विभाग के उच्च अधिकारियों चीफ प्रोक्योरमेंट रंजन सिन्हा, चीफ प्रोक्योरमेंट डिलीवरी मैनेजमेंट राणा दास, चीफ प्रोक्योरमेंट सप्लायर मैनेजमेंट एंड प्रोसेस इम्पू्रवमेंट राहुल लाल, चीफ कॉमर्शियल मैन्यूफैक्चरिंग संग्राम केसरी पांडा, चीफ प्रोक्योरमेंट लॉजिस्टिक शांतनु वर्मा के अलावा अन्य अधिकारी अशोक कुमार, रविन्द्र कुमार, सुमन कुमार सिंह, वी.सुरेश विजयन, सत्यव्रत महापात्रा, श्रवणी झा, ए.रमेश बाबू, रविकांत गुप्ता, कुमार गोपाल, रत्नेश कुमार, सौरभ चटर्जी, ऋषभ नारायण सिंह उपस्थित थे।

बैठक में स्वागत भाषण करते हुये अध्यक्ष मानव केडिया ने कहा कि सिंहभूम चैम्बर अपनी जिम्मेदारियों और कर्तव्य को पूरा करने की दिशा में कार्य करते हुये एक सतत प्रक्रिया के तहत टाटा स्टील प्रोक्योरमेंट विभाग और स्थानीय वेंडरों के बीच सेतु का कार्य करते हुये वेंडरों की समस्याओं को प्रोक्योरमेंट विभाग के समक्ष उठाता रहा है। टाटा स्टील प्रोक्योरमेंट विभाग भी चैम्बर के द्वारा उठाये गये मुद्दों पर ध्यान देकर उनके निराकरण का लगातार प्रयास कर रहा है। यह टाटा स्टील वेंडर हित के लिये कार्य करने की उच्च स्तरीय पद्धति को दर्षाता है। श्रृंखलागत प्रक्रिया के तहत जुलाई के पश्चात् आज आयोजित हो रही बैठक में चैम्बर वेंडरों एवं सभी हितधारकों के सुचारू रूप से व्यवसायिक संचालन में आज रही समस्याओं की ओर आपका ध्यानाकृष्ट करा रही है जिसका निराकरण आवष्यक है।

बैठक में विषय प्रवेश करते हुये उपाध्यक्ष, उद्योग हर्ष बाकरेवाल एवं उपाध्यक्ष अधिवक्त राजीव अग्रवाल ने निम्नलिखित मुद्दो को प्रोक्योरमेंट अधिकारियों के समक्ष रखा –

1) आगामी विस्तार योजनाओं को देखते हुये टाटा स्टील के सभी संयंत्रों में कार्य करने वाले विशेष कौशल वाले अनुभवी तकनीशियनों के लिये मल्टी लोकेशन गेट पास आवश्यक है।

2) परिवार के भीतर किसी स्वामित्व वाली फर्म के स्वामित्व में परिवर्तन, मृत्यु या सेवानिवृति के कारण पैन नंबर मंे परिवर्तन के कारण उसी फर्म के लिये नया वेंडर कोड बनाया जा रहा है। इससे पुराने वेंडर कोड में किये कार्य का उल्लेख नहीं रहता है। और नया वेंडर कोड बनाने की प्रक्रिया भी बहुत लंबी होती है जिससे पारिवारिक व्यवसाय करने वाले वेंडरों को परेषानी का सामना करना पड़ता है। इसे सरल बनाया जाना चाहिए और ऐसी परिस्थिति में पुराने वेंडर कोड को ही मान्यता दी जानी चाहिए।

3) टाटा स्टील के द्वारा जारी अधिकांश इन्क्वायरी विशेषकर जहां वस्तुओं का आयात किया जाना है और वस्तुयें की दरें डॉलर, यूरो पर आधारित होती है। वेंडर कोटेशन में भी इसी का उल्लेख करता है। लेकिन टाटा स्टील के द्वारा इस कोटेशन की वैद्यता पर विचार नहीं करता है और कई बार कोटेशन जमा करने की तिथि से चार महीने बाद भी कोटेशन को नहीं खोला जाता है। इसपर ध्यान देने की आवश्यकता है।

4) टाटा स्टील इकोसिस्टम में नये एकीकृत संयंत्रों में अभी भी नये वेंडरों के द्वारा सस्ते होने के कारण गैर अनुमोदित ब्रांड की वस्तुयें खरीदी जा रही है। पुरानें वेंडर टाटा स्टील के मानको और विशिष्टताओं को ध्यान में रखकर अनुमोदित ब्रांड के साथ कोटेशन देते रहे हैं, जिसमें वस्तुआंे की कीमत थोड़ी महंगी होती है। इसपर भी विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।

5) लॉग इन प्रक्रिया के दौरान भरे जाने वाले कैप्चा को आसान बनाया जाना चाहिए।

6) बिल अपलोड करने की प्रक्रिया अभी भी पूरी तरह से सही नहीं है। इसमें परेशानी होने पर दोबारा बिल मेल के माध्यम से मांगे जाते हैं। इसमें समाधान की आवष्यकता है।

7) वेंडरों को सामग्री भेजने से पहले षिपमेंट तैयार होने पर अभी भी कोविड वैक्सीन प्रमाणपत्र अपलोड करना आवष्यक है, जो वर्तमान में अप्रासंगिक लगता है। इसे अब हटा दिया जाना चाहिए।

8) प्रत्येक ऑर्डर में टैन नंबर उल्लेख करने की प्रक्रिया सुचारू ढंग से होनी चाहिए।

9) एकाउण्ट्स से संबंधित मामलांे पर वेंडरों को अपनी बात रखने के लिये एक स्थाई संपर्क व्यवस्था हो।

बैठक में उपस्थित वेंडरों ने भी अपनी-अपनी समस्याओं को अधिकारियों के समक्ष रखा। जिसपर प्रोक्योरमेंट अधिकारियों ने निराकरण का आष्वासन दिया।

बैठक के अंत में धन्यवाद ज्ञापन मानद महासचिव पुनीत कांवटिया ने किया। तत्पश्चात् बैठक समाप्त की गई। इससे पूर्व उपाध्यक्ष अभिषेक अग्रवाल गोल्डी, सचिव, उद्योग बिनोद शर्मा एवं सचिव अंशुल रिंगसिया ने उपस्थित अतिथियों को सम्मानित किया।

बैठक में प्रमुख रूप से निवर्तमान अघ्यक्ष विजय आनंद मूनका, पूर्व अध्यक्ष उमेश कांवटिया, संजय मिश्रा, प्रतीक अग्रवाल, नंदन कांवटिया, चन्द्रकांत जटाकिया, अमरनाथ कसेरा, अर्चित बागरोदिया, सुनीत बागरोदिया, अनिरूद्ध सिंहानिया, परमानंद पाण्डे, बीएस बजाज, बीएस धनजाल, तौकीर हुसैन, एसएस मुखर्जी, मनोज कुमार, नवल सांेथालिया, एसके अग्रवाल, उमंग अग्रवाल, रितेश अग्रवाल, बीके जैन, अजय अग्रवाल, जिग्नेष वसानी, नीरज पंचमिया, वनीश आगीवाल, विवेक तुलस्यान, प्रषांत गोधी के अलावा बड़ी संख्या में सदस्यगण उपस्थित थे।

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