Breaking
Tue. Mar 3rd, 2026

धालभूमगढ़ थाना प्रभारी पवन कुमार निलंबित, महिला आरक्षी से छेड़छाड़ के आरोप में हुई कार्रवाई

जमशेदपुर। पूर्वी सिंहभूम जिले के धालभूमगढ़ थाना प्रभारी पवन कुमार पर सहकर्मी महिला आरक्षी से छेड़छाड़ के गंभीर आरोप सही पाए जाने के बाद एसएसपी पीयूष पांडेय ने उन्हें निलंबित कर पुलिस लाइन भेज दिया है। इस कार्रवाई से पुलिस महकमे में हड़कंप मचा हुआ है। सवाल उठ रहा है कि जब थाना परिसर में कार्यरत महिला पुलिसकर्मी ही सुरक्षित नहीं हैं, तो आम महिलाओं की सुरक्षा की गारंटी कैसे दी जा सकती है।

जानकारी के अनुसार, 17 अक्टूबर को एक महिला आरक्षी ने जिला पुलिस कप्तान को लिखित शिकायत दी थी। इसमें आरोप लगाया गया था कि थाना प्रभारी ने उन्हें अपने चेंबर में बुलाकर अनुचित व्यवहार किया, हाथ पकड़ा और व्यक्तिगत मोबाइल नंबर मांगा। आरक्षी ने यह भी बताया कि थाना प्रभारी ने 28, 29 और 30 सितंबर को कई बार फोन कर परेशान किया। यही सिलसिला 8 और 9 अक्टूबर को भी जारी रहा। लगातार मानसिक प्रताड़ना से परेशान होकर महिला आरक्षी ने आखिरकार सुरक्षा की गुहार लगाई।

शिकायत के बाद जांच की जिम्मेदारी घाटशिला एसडीपीओ अजीत कुजूर को दी गई। उन्होंने थाना स्टाफ और महिला चौकीदारों से पूछताछ की और बयानों के साथ अन्य तथ्यों की जांच की। जांच रिपोर्ट में आरोप सही पाए गए, जिसके बाद एसएसपी ने पवन कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर पुलिस लाइन में योगदान देने का आदेश दिया।

दूसरी ओर, पवन कुमार ने अपने ऊपर लगे आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि उन्हें साजिश के तहत फंसाया गया है। उन्होंने कहा कि कोई प्रत्यक्ष गवाह नहीं है और केवल बयानों के आधार पर उन्हें दोषी ठहराया गया है। उनके अनुसार, उनके पास कॉल रिकॉर्ड और बातचीत के सबूत हैं जिन्हें वे अदालत में पेश करेंगे।

सूत्रों के अनुसार, पवन कुमार का नाम विवादों से पहले भी जुड़ता रहा है। पिछले एक साल में वे गुड़ाबांदा, सुंदरनगर और धालभूमगढ़ तीन थानों के प्रभारी रह चुके हैं, लेकिन किसी भी जगह चार महीने से अधिक टिक नहीं पाए। हर जगह किसी न किसी विवाद में उनका नाम सामने आता रहा है। निलंबन के बाद धालभूमगढ़ थाना की जिम्मेदारी एसआई धीरज मिश्रा को सौंपी गई है।

महिला आरक्षी को अपने ही थाने में सुरक्षा की गुहार लगानी पड़ी, यह पुलिस व्यवस्था की गंभीर विफलता को दर्शाता है। यह मामला न केवल पुलिस विभाग की आंतरिक संवेदनशीलता पर सवाल खड़ा करता है बल्कि महिला कर्मियों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी गंभीर चिंतन की मांग करता है।

Related Post