Breaking
Wed. Mar 4th, 2026

अन्यायपूर्ण परिवहन चालान नियमों के विरुद्ध सिंहभूम चेंबर की आपत्ति, अधिसूचना वापस लेने की मांग

सिंहभूम चैंबर ऑफ कॉमर्स एण्ड इंडस्ट्री की ओर से परिवहन क्षेत्र के हित में ड्राफ्ट अधिसूचना GSR 723(E), दिनांक 29 सितम्बर 2025, के संदर्भ में भारत सरकार के अपर सचिव, श्री महमूद अहमद, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को विस्तृत आपत्तियाँ एवं सुझाव प्रेषित किये हैं।

चेंबर अध्यक्ष मानव केडिया ने बताया कि ड्राफ्ट अधिसूचना GSR 723(E), दिनांक 29 सितम्बर 2025 के माध्यम से सरकार ने चालान एवं दंड-प्रक्रिया में ऐसे प्रावधान प्रस्तावित किए हैं, जो न केवल अत्यधिक कठोर हैं बल्कि प्राकृतिक न्याय और संवैधानिक अधिकारों के प्रतिकूल भी हैं। बिना किसी सुनवाई, बिना मानव-जाँच और बिना न्यायिक परीक्षण — कैमरे या इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम द्वारा जनित एक ई-चालान को “दोष सिद्ध” मानकर लाइसेंस निलंबित करना, वाहन ब्लैकलिस्ट करना, और यानी व्यावसायिक गतिविधि ठप कर देना — यह किसी भी न्याय व्यवस्था की मूल आत्मा के अनुकूल नहीं है।

हम यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि तकनीक का प्रयोग हमें स्वीकार है कि तकनीक निर्णय दे सकती है, लेकिन न्याय नहीं। न्याय तभी कहा जाएगा जब व्यक्ति को सुने जाने का अधिकार मिले, त्रुटि-सुधार का अवसर मिले, अपील का मार्ग उपलब्ध हो और दंड केवल दोष सिद्धि के बाद ही लगाया जाए, न कि आरोप मात्र के आधार पर।

प्रस्तावित प्रावधानों के तहत —

• पाँच चालान पर स्वतः लाइसेंस निलंबन,

• 45 दिन में जवाब न देने पर “दोषी माने जाना”,

• 50% प्री-डिपॉजिट के बिना अपील स्वीकार न करना,

• वाहन को “Not to be Transacted” श्रेणी में डालकर व्यापार रोक देना —

ये सारे प्रावधान छोटे एवं मध्यम परिवहन ऑपरेटरों की आजीविका पर सीधा हमला हैं। यह केवल काग़ज़ पर नियम नहीं हैं अपितु सड़क पर चलने वाली हर ट्रक, हर बस, हर रूट-परमिटधारी व्यापारी की रोटी-रोज़ी से जुड़े प्रावधान हैं। किसी एक गलत चालान, किसी एक तकनीकी त्रुटि या किसी अधिकारी के दुरुपयोग के कारण पूरा व्यवसाय ठप पड़ सकता है। यह किसी भी सभ्य अर्थव्यवस्था के लिए स्वीकार्य नहीं हो सकता।

हम यह भी कहना चाहते हैं कि यह मात्र आर्थिक मुद्दा नहीं है — यह संवैधानिक मुद्दा है।

अनुच्छेद 14 — समानता व न्याय

अनुच्छेद 19(1)(g) — व्यापार एवं व्यवसाय की स्वतंत्रता

अनुच्छेद 21 — गरिमामय जीवन और आजीविका का अधिकार

इन तीनों के उल्लंघन की आशंका इस ड्राफ्ट में स्पष्ट रूप से परिलक्षित होती है।

इसलिए सिंहभूम चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री की मुख्य माँगें बिल्कुल स्पष्ट हैं:

1. इस ड्राफ्ट अधिसूचना GSR 723(E) को या तो वापिस लिया जाए, या व्यापक संशोधन कर पुनः प्रस्तुत किया जाए।

2. किसी भी चालान पर दंड तभी लागू हो, जब दोष सिद्धि न्यायिक रूप से हो — न कि केवल ई-चालान प्रविष्टि के आधार पर।

3. स्वतंत्र और न्यायिक प्रकृति की अपील व्यवस्था अनिवार्य की जाए — बिना प्री-डिपॉजिट।

4. तकनीकी त्रुटि, चालक-दोष और मालिक-दोष में स्पष्ट अंतर कर न्याय-सम्मत प्रावधान बनें।

5. किसी भी वाहन को livelihood-paralysis स्वरूप “ब्लैकलिस्ट” करने से पहले अंतिम न्यायिक आदेश आवश्यक हो।

6. सभी हितधारकों — चैंबर, ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन, तकनीकी विशेषज्ञ एवं विधि-विशेषज्ञों — से परामर्श कर नियमों को अंतिम रूप दिया जाए।

हम सरकार से संवाद चाहते हैं, टकराव नहीं — लेकिन यदि संवाद न हुआ और यह अधिसूचना यथावत लागू की गई, तो यह पूरा परिवहन क्षेत्र एक बड़े संकट की तरफ़ धकेला जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी सरकार पर होगी।

धन्यवाद।

मानव केडिया

अध्यक्ष

Related Post