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जमशेदपुर में जलजमाव की त्रासदी: सरकारी कॉलोनी, स्वर्णरेखा नदी के किनारे बसे इलाके और संकरी गलियों में पानी-पानी

जमशेदपुर। लगातार हो रही बारिश ने शहर की जल निकासी व्यवस्था की पोल खोल दी है। सरकारी कॉलोनियों, स्वर्णरेखा नदी के किनारे बसे मोहल्लों और संकरी गलियों में जलजमाव से लोग बेहाल हैं। नालों की सफाई नहीं होने और सिस्टम की लापरवाही के कारण बाढ़ जैसी स्थिति बन गई है।

मानसून की पहली ही बारिश ने नगर निगम और शहरी विकास विभाग की तैयारियों की सच्चाई उजागर कर दी है। मानगो, साकची, बागबेड़ा, कदमा और गोविंदपुर जैसे घनी आबादी वाले इलाकों के साथ-साथ सरकारी आवासीय कॉलोनियों और स्वर्णरेखा नदी के किनारे बसे क्षेत्रों में जलजमाव की भयावह स्थिति पैदा हो गई है।

विशेष रूप से स्वर्णरेखा और खरकाई नदी के निचले हिस्सों में बसे मोहल्लों में घरों में पानी घुस गया है। कई स्थानों पर बस्तियां बाढ़ जैसी स्थिति में घिरी हैं।

मानगो के जवाहर नगर, उलीडीह टैंक रोड, रोड नंबर 10 और 15, दाईगुट्टू, आजादनगर, बागुननगर और डिमना रोड जैसे इलाकों की संकरी गलियों में पानी का बहाव थम चुका है। ऑप्टिमस टावर के बेसमेंट में पानी भरने से दर्जनों वाहन जलमग्न हो गए हैं। बिजली का कनेक्शन बंद कर दिया गया है ताकि किसी बड़ी दुर्घटना से बचा जा सके।

स्थानीय निवासी इफ्तेखार अली ने बताया कि नगर निगम को कई बार कॉल करने के बाद भी कोई राहत नहीं मिली। एक सिटी मैनेजर ने यहां तक कह दिया कि “सैकड़ों कॉल आ रहे हैं, किस-किस की समस्या सुनें?” यह जवाब लोगों के आक्रोश को और भड़का रहा है।

वसीम अहमद, जो ऑप्टिमस टावर के पास दुकान चलाते हैं, बताते हैं कि नाले की सफाई इस साल एक बार भी नहीं हुई। “पानी उतरने का कोई रास्ता नहीं है। हम हर साल यही झेलते हैं,” उन्होंने कहा।

पूर्व भाजपा नेता विकास सिंह ने उलीडीह टैंक रोड का वीडियो साझा कर नगर निगम और जनप्रतिनिधियों पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा, “अगर जनप्रतिनिधि फोटो खिंचवाने के बजाय ईमानदारी से काम करते, तो मानसून से पहले नालों की सफाई होती, जल निकासी का इंतजाम होता और लोगों को यह दिन नहीं देखना पड़ता।”

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मौसम विभाग द्वारा पहले ही भारी बारिश की चेतावनी दी गई थी, फिर भी नगर निगम और संबंधित विभाग सोते रहे।

जमशेदपुर की जल निकासी व्यवस्था की बदहाली अब किसी से छिपी नहीं है। हर बारिश में शहर के बड़े हिस्से जलमग्न हो जाते हैं और प्रशासन हाथ पर हाथ धरे बैठा रहता है। नालों की समय पर सफाई, जल निकासी के वैज्ञानिक इंतजाम और सक्रिय जनप्रतिनिधित्व की गैरमौजूदगी शहर को हर साल डुबो रही है। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह समस्या और गंभीर रूप ले सकती है।

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