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Wed. Mar 11th, 2026

झारखंड की सबसे महंगी सब्जी – पुटू 

सबसे महंगी सब्जी – पुटू

मोहम्मद सहजाद आलम।

मानसून आते ही उमस और बादल की गर्जनाओं के साथ ही महुआडांड़ में लोगो के चेहरों पर एक अलग ही खुशी नजर आती है। इस अलग तरह की खुशी का कारण है एक सब्जी, यह सब्जी है पुटू, जिसे खाने के लिये लोग साल भर इंतजार करते है।

पुटू धरती से निकलने वाले जंगली खादय है, यह पुटू साल (सखूआ) वृक्षों के नीचे निकलता है, जब बादलों की गर्जना होती है, उमस का वातावरण हो जाता है उस समय पुटू स्वत जमीन के अंदर आकार लेता है. स्थानीय ग्रामीण धरती खोदकर पुटू निकालते है, बोड़ा आकार में छोटे आलू से आधा या उससे छोटा होता है. रंग इसका भूरा होता है। उपर पतली सी परत एवं अंदर सफेद गुदा भरा होता है।

साल के अधिकतर वृक्ष महुआडांड़ वन प्रक्षेत्र क्षेत्र में है, इसलिये महुआडांड़ में पूटू की आवक सबसे ज्यादा होती है, पूटू खाने वालों के अनुसार यह दो किस्म का होता है जात पूटू और राखड़ी पुटू, जिसमें से जात बोड़ा ज्यादा स्वादिष्ट होता है।

पुटू में आवश्यक खनिज लवण एवं कार्बोहाईड्रेट भरपूर मात्रा में होता है। इसकी सब्जी बेहद ही स्वादिष्ट होती है। बाजार में आते ही लोग इसे खरीदने के लिये टूट पड़ते है। इसकी आवक सिर्फ शुरूआती बरसात तक लगभग एक माह तक ही होती है। इसलिये इसकी कीमत भी आसमान को छुती है। शुरूआती दौर में यह बोड़ा 1600 रू. किलो तक बिकता है। बाद में अधिक आवक से इसकी कीमत दौ सौ से तीन सौ रू. किलो तक हो जाती है।

ग्रामीण महिलायें इसे आज भी सोली( दोना) के पैमाने से बेचती है। एक दोना लगभग 250 ग्राम की होती है, एक दोना बोड़ा शुरूआत में 300 रुपए एवं बाद में 200 रुपए दर से मिलता है, यह महुआडांड की सबसे महंगी सब्जियों में से एक है फिर भी इसके स्वाद के कारण लोग बड़े शौक से खरीद कर खाते है।

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