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Wed. Mar 11th, 2026

खुले आसमान में होती है पढ़ाई, बरसात आते ही हो जाती है बंद।

खुले आसमान में होती है पढ़ाई, बरसात आते ही हो जाती है बंद।

महुआडांड़ संवाददाता शहजाद आलम की रिपोर्ट

महुआडांड़: महुआडांड़ प्रखंड के अतिनक्सल प्रभावित और अति पिछड़ा गांव तिसिया की जहा एकमात्र प्राथमिक विद्यालय डांडूलवार के छात्रों को खुले आसमान के नीचे पढ़ाई करनी पड़ती है।क्योंकि यहां स्कूल में पढ़ऩे वाले बच्चों के लिए कमरे ही नहीं हैं।

 

चाहे कड़कड़ाती ठंड हो या फिर चिलचिलाती धूप छोटे-छोटे बच्चों को बाहर खुले आसमान में पेड़ के नीचे बैठकर अपनी शिक्षा दीक्षा लेनी पड़ती है। अगर बरसात आ जाए तो फिर भगवान ही मालिक है।गौरतलब है कि स्कूल में 35 बच्चो का नामांकित है,जिन्हे पढ़ाने के लिए एकमात्र सहायक शिक्षक महेंद्र खलखो है।

 

सहायक शिक्षक महेंद्र खलखो ने बताया कि पिछले वर्ष विद्यालय का भवन गिर गया था।जिसके कारण बच्चो को खुले में पढ़ाना पड़ता है।इस संबंध मे महुआडांड़ बी आर सी कर्मी नाहिद जमाल ने बताया कि डांडुलबार भवन के गिरने के संबंध में पिछले साल अगस्त से ही वरीय अधिकारियों को सूचित किया जा चुका है।

 

नव निर्मित पी एम आवास में पढ़ते हैं बच्चे

डांडुलबार विद्यालय शिक्षा समिति के अध्यक्ष खरीदन किसान ने बताया कि पूर्व में विद्यालय में 2 शिक्षक पदस्थापित थे। लेकिन वह विद्यालय कभी नही आते थे जिसके कारण शिक्षा विभाग द्वारा उनकी जगह पर एक मात्र सहायक शिक्षक महेंद्र खलखो को नियुक्त किया गया।

 

वह भी जब नदी में पानी कम रहता है तभी आते है।वही विधालय भवन नही होने से बच्चों की परेशानी को देखते हुए गांव के एक नव निर्मित पी एम आवास में बच्ची को शिक्षा दी जाती है।मगर यह बच्चों को पढ़ाने के लिए नाकाफी है, क्योंकि पढ़ाई तो किसी तरीके से हो जाती

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