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पोटका प्रखंड के आसनबनी पंचायत स्थित गाँव – तिलामुड़ा की टोला – लखनडीह में ही एक सिर्फ और सिर्फ अत्यंत ही गरीबों का छोटा सा बस्ती है जिसका नाम है आज़ाद बस्ती। जिस बस्ती में रहने वाले प्रायः सभी अनपढ़ है, गरीब है, इंट भट्टा आदि में दैनिक मजदूरी करने वाले लोग हैं – जिनके परिवार तो बड़े बड़े है पर सर ढकने की जगह झोंपड़ी नुमा एक एक घर मात्र है।जो मिट्टी की दीवाल और फुस की छाद में हर वर्ष आँधी तूफान बर्षात के प्रहार से अपनी जर्जर हाल बयाँ कर रही है। मरम्मती के नाम पर कम मजदूरी में जीने वाले ये मजदुरें अपनी परिवार की पेट काटकर कँही प्लास्टिक की टुकड़ा तो कँही अधपुरे ढंकने वाली छोटी सी तिरपाल डाल कर मनो किसी तरह उसे समझा बुझा के रखा है की – भाई और दो दिन…..काश किसी की नजर उन पर पड़े – उन्हें भी किसी सरकारी योजना का लाभ मिले – कोई राहत मिले !
अन्ततः तत्कालीन जिलापार्षद श्रीमती प्रतिमा रानी मंडल द्वारा इनकी दयनीय स्थिति के बारे में तत्कालीन उपायुक्त सूरज कुमार के समक्ष विस्तृत जानकारी देने के पश्चात उनके ही निर्देश पर अपने पत्रांक – 751/2021, दिनांक – 25/11/2021 के माध्यम से उक्त आज़ाद बस्ती के सभी जर्जर परिवारों की सूची एवं फोटो के साथ आपदा राहत कोष के माध्यम से सहयोग की अनुरोध कि गई थी। चूँकि उस समय ना तो पी.एम्.आवास की कोई ऑप्सन था और ना ही अम्बेडकर आवास की तब उपायुक्त के साथ टेवुल टॉक में तय हुई थी इन्हें 95 हजार तक की मुआवजा राशी आवंटित कि जायेगी जिससे किसी तरह इनके रहने लायक घर बन जाय बशर्ते अंचल से उसकी रिपोर्ट भेजी जाय। उपायुक्त सूरज कुमार द्वारा त्वरित कार्रवाई करते हुये मार्गदर्शन के साथ आवेदन को अंचल पोटका वापस भेज गया । – इन गरीबों की दुर्भाग्य बोलिये या पोटका अंचल कर्मिओं के लापरवाही बोलिये अंचल कर्मचारी द्वारा माँगे जाने पर सभी पीड़ितों ने जमीन आदि सारी जरूरी कागजातों के साथ पुनः अपनी अपनी आवेदने कार्यालय में जमा तो किया गया पर कार्यालय से ही आवेदनें गायब हो गई। सब को लगा कार्रवाई चल रही है आज नहीं तो कल मुआवजा जरूर मिलेगी। जब कयेक माह पार हो जाने के बाद भी कुछ कार्रवाई नजर नहीं आया तो जिलापार्षद स्तर पर कार्यालय से जानकारी लेने की प्रयाश किये जाने पर पता चला की आवेदन सब गायब है। – यह है अंचल पोटका की हाल।
चूँकि काम करवाना था – जरूरतमन्दों को लाभ दिलवाना था और हाथ में समय भी कम था मार्च की ईयर इंडिंग होने ही वाला था तो कार्यालय में बहस के बजाय काम को ही प्राथमिकता दी गई। – अन्ततः जिलापार्षद के प्रयाश से पुनः सभी आवेदनों को कार्यालय में प्रस्तुत किया गया, पर जब तक जिला भेजा गया तब तक काफी देर हो चूका था। ईयर इंडिंग भी हुआ, उपायुक्त सूरज कुमार भी चले गये, जिलापार्षद श्रीमती मंडल भी नहीं रहे – पर बार बार अंचल अधिकारी पोटका को इनकी सूचना दिया जाता रहा पर आज तक इन गरीबों को एक तिरपाल भी नसीब नहीं हुआ है।
बर्तमान इस बर्षात के मौसम में छोटे छोटे बच्चे, बुजर्गों को लेकर ऐसी संकट को दस्तक देने वाली झोपड़ियों में रहना इनकी मजबूरी है – पूर्व जिलापार्षद करुणा मय मंडल ने कहा अगर इस हफ्ते में अंचल कार्यालय द्वारा इन्हें कोई राहत पंहुचाने की प्रबंध नहीं कि गई तो निश्चित रूप से इन पीड़ित परिवारों को लेकर अगले सोमबार को वर्तमान उपायुक्त श्रीमती याधव के समक्ष सारी समस्यायें रखीं जायेगी। पीड़ित परिवारों में मुख्य रूप से – दुखुन माझी, गुरुबारी माझी, कल्पना माझी,मंगली माझी, अर्जुन माझी, बिमला माझी, आदुरी मुदी, मुनी माझी, सुरु बारी माझी, सुरु बूढी भकत, बीरमला भकत आदि है जिनकी घरों की स्थिति अत्यंत ही दयनीय है।
उपायुक्त के निर्देश के करीब 8 माह बीत जाने के बावजूद प्राकृतिक आपदा से पीड़ित गरीब बस्ती के एक भी सदस्यों को ना ही मिला मुआवजा ना. ही मिला अंबेडकर आवास और ना ही मिला छत ढकने का एक तीरपाल
