*अग्नि के प्रकोप से लाखो लाख की कीमती लकड़ियां जल कर राख हो रही है वन विभाग चैन में*
चंदवा संवाददाता मुकेश कुमार सिंह की रिपोर्ट
चंदवा 28 मार्च 2022 , चंदवा के जंगलों में जहां देखो वही जंगल धु, धु कर जलते नजर आ रहा है, वन विभाग के कर्मचारियों का कहना है, की महुवा चुनने वाले लोग अक्सर जंगलो में आग लगा दिया करते है। कुछ प्रतिशत इसमे सचाई भी है, की महुवा चुनने वाले लोग सफाई करने के ख्याल से आग लगा दिया करते है।
जहा पर महुआ का पेड़ नही है, वैसे जगहों आग कैसे लग जाती है। इस तथ्य को छिपाने के लिए वन विभाग के लोग महुवा चुनने वाले पर आरोप लगाया करते है।
ज्ञात हो कि वन विभाग में फायरवाचर रखने का प्रवधान है, यह तथ्य स्पस्ट करता है कि फायरवाचरो के नाम पर राशि की बन्दर बाट की जाती है, पहले स्थानीय जनता को घर बनाने जलावन के लिए निश्चित स्थान वन क्षेत्र के अंदर किया जाता था। लेकिन आज ऐसे कोई व्यवस्था नही है जिसके परिणामस्वरूप जंगलो में लगे हुए आग को जनता बुझाने में कोई सहयोग नही करती है, वन विभाग की लचर व्यवस्था के कारण वनों की दुर्दशा दिन प्रतिदिन होती जा रही है।
दिखावे के लिए वन विभाग द्वारा ग्रामो में वन समितिया बनाई जाती रही है। लेकिन वन सुरक्षा के नाम पर एक भी वन समिति के सदस्य सक्रिये दिखाई नही पड़ते है। पहले वन समितिया नही थी फिर भी आज के अपेक्षा जंगल काफी सुरक्षित था। जंगलो में आग से लाखों करोड़ों की वंसम्पति प्रति वर्ष नष्ट होती आ रही है। लेकिन वह विभाग वनों की सुरक्षा करने में विफल होती प्रतीत हो रही है। अभी मार्च माह ही समाप्ति के कगार पर है अप्रैल ,मई, जून की प्रचंड गर्मी से जंगलो में भीष्म आग लगने की संभावना है। और वन विभाग के पदाधिकारियों तथा कर्मचारियों की चैन की निद्रा भंग नही हो रही है।

