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Fri. Feb 6th, 2026

दिसंबर माह से ही गुलजार हो जाता है महुआडांड़ के पर्यटक स्थल लोध फॉल व नेतरहाट।

दिसंबर माह से ही गुलजार हो जाता है महुआडांड़ के पर्यटक स्थल लोध फॉल व नेतरहाट।

सुरक्षा व्यवस्था का रखना पड़ेगा ख्याल,ताकि दुर्घटना से बचा जा सके।

पर्वत जंगलों में पहाड़ी नदियों और छोटे बड़े जलप्रपात से महुआडांड़ भरा पड़ा है, लोध फॉल झारखंड का सबसे ऊंचा जलप्रपात है।

पर्यटकों को लुभा रहा है झारखंड का सबसे ऊंचा जलप्रपात लोध फॉल और प्राकृतिक सुंदरता से घिरा नेतरहाट।

 

नया शाल आने को है और महुआडांड़ का लोध फॉल व नेतरहाट शैलानियों के स्वागत के लिए तैयार है।

आने वाले नए शाल में महुआडांड़ से 17 किलोमीटर दूरी पर पश्चिम दिशा में स्थित लोध फॉल प्राकृतिक छटा से सैलानियों को लुभा रहा है। यह झारखंड का सबसे ऊंचा जलप्रपात है ।जिसकी समुद्र तल से ऊंचाई 800 मीटर है जहां 143 मीटर की ऊंचाई से पानी नीचे गिरता है ।हरी-भरी वादियों पर्वत जंगलों से पहाड़ी नदियां और छोटे बड़े जलप्रपात से महुआडांड़ भरा पड़ा है ।

प्रखंड के नेतरहाट और लोध फॉल के रमणिक स्थल को देखने के लिए सालों भर हर मौसम में पश्चिम बंगाल, बिहार, छत्तीसगढ़ के साथ अन्य राज्यों के अलावा साल के पहले जनवरी में विदेश से पर्यटक आते रहते हैं ।साल का अंतिम माह दिसम्बर से ही इन जगहों पर भीड़ उमड़ने लगी है। सभी पर्यटक स्थल गुलजार हो गए हैं। प्रखंड महुआडांड़ मुख्यालय से 45 किलोमीटर दूर नेतरहाट की पहाड़ियों में सर्दियों में सूर्यास्त व सूर्योदय दृश्य काफी सुहावना होता है जिसे देखने के लिए सुबह शाम पर्यटकों की भीड़ लगी रहती है।

बताते चलें कि नेतरहाट को झारखंड की रानी भी कहा जाता है। यह एक हिल स्टेशन के नाम से भी जाना जाता है। स्टेशन है। इसकी उचाई समुद्र तल से 3622 फीट है ।अपनी मनमोहक खूबसूरती प्राकृतिक नजारा और स्वच्छ वातावरण के कारण पर्यटकों का मन मोह लेती है ।चारों ओर सैलानियों व पर्यटकों के पिकनिक सपोर्ट होने के कारण यह दोनों पर्यटक स्थल चर्चित हैं। नेतरहाट में दो जलप्रपात लोउर घाघरी और अपर घाघरी भी पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है। नेतरहाट में पर्यटकों का ठहराव के लिए पलामू डाक बंगला, होटल प्रभात, वन विभाग का गेस्ट हाउस, रवि शशि होटल सहित कई अन्य होटल मौजूद है ।जहां ठहरने की उत्तम व्यवस्था है। वही महुआडांड़ के लोध फॉल जाने वाली सड़क अब बन चुके हैं ।लोध फॉल पहुंच मार्ग के करीब 1 किलोमीटर तक सड़क खराब होने के कारण छोटे बड़े वाहनों को आने जाने में दिक्कत होती है। लोध फॉल की खास बात है कि दोपहर के बाद सूरज की किरने नहीं दिखाई देती। शाम 4:00 बजे के बाद सर्दियों के समय जल्दी वापस आने में ही लोगों की भलाई है। वहीं पर्यटक विभाग और इको विकास समिति के द्वारा लोध फॉल में गार्ड की नियुक्ति की गई है जो सुबह से शाम तक वहां मौजूद रहते हैं। और वहां आने जाने वाले लोगों का ख्याल रखते हैं। और लोध फॉल से संबंधित लोगों को जानकारी भी देते हैं। वहां पर एक दो छोटे-छोटे होटल में खोलेंगे जहां पर चार्ट समोसे आदि मिलते हैं।

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