खूंटपानी: विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर शुक्रवार को डालसा के तत्वावधान में खूंटपानी प्रखंड कार्यालय परिसर में विधिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के माध्यम से लोगों को बाल श्रम के दुष्परिणाम, बच्चों के अधिकार और इससे जुड़े कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी गई।
राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) दिल्ली और झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार (झालसा) रांची के निर्देश तथा प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष डालसा चाईबासा के मार्गदर्शन में जिले भर में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में खूंटपानी प्रखंड कार्यालय परिसर में आयोजित कार्यक्रम में प्रखंड विकास पदाधिकारी धनंजय पाठक शामिल हुए।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बीडीओ धनंजय पाठक ने कहा कि प्रत्येक वर्ष 12 जून को बाल श्रम निषेध दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य बाल श्रम को रोकना और बच्चों को शिक्षा एवं विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि यदि समाज के सभी लोग मिलकर प्रयास करें तो बाल श्रम को समाप्त किया जा सकता है। सरकार ने बच्चों के लिए निःशुल्क और समावेशी शिक्षा की व्यवस्था की है, ताकि बच्चे मजदूरी की ओर न जाएं।
इस अवसर पर अंचल अधिकारी फूलेश्वर साव ने कहा कि परिवारों को मजबूत बनाकर और बाल श्रम के दुष्परिणामों की जानकारी देकर बच्चों को काम पर भेजने की प्रवृत्ति को कम किया जा सकता है।
पीएलवी अलकमा रूही ने बाल श्रम विरोधी कानूनों की जानकारी देते हुए कहा कि कानूनों का सख्ती से पालन और उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई से इस समस्या को काफी हद तक रोका जा सकता है।
पीएलवी सूरज ठाकुर ने कहा कि आज भी बड़ी संख्या में बच्चे बाल श्रम में लगे हुए हैं। कई बच्चे ऐसे कार्यों में लगे होते हैं, जिससे उनके स्वास्थ्य और विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) ने वर्ष 2002 में बाल श्रम के खिलाफ विश्व दिवस की शुरुआत की थी।
उन्होंने लोगों से अपील की कि यदि कहीं कोई बच्चा शोषित अवस्था में काम करता दिखाई दे तो इसकी सूचना नालसा के टोल फ्री नंबर 15100 पर देकर सहायता प्राप्त की जा सकती है।
कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को बच्चों के अधिकारों और उनकी सुरक्षा को लेकर जागरूक किया गया। इस संबंध में जानकारी डालसा सचिव रवि चौधरी ने दी।

