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ऑपरेशन “नन्हे फरिश्ते” के तहत आरपीएफ रांची ने दो नाबालिग बालिकाओं को सुरक्षित संरक्षण दिलाया

रांची। रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) रांची ने रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों में बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए चलाए जा रहे “ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते” के तहत दो अलग-अलग मामलों में नाबालिग बालिकाओं को सुरक्षित संरक्षण प्रदान कर मानवीय संवेदनशीलता और सतर्कता का परिचय दिया है।

पहली घटना 7 जून 2026 की है, जब ट्रेन संख्या 12817/18625 एक्सप्रेस में रांची से बोकारो और वापसी के दौरान एस्कॉर्टिंग ड्यूटी पर तैनात आरपीएफ टीम को ट्रेन के एस-6 कोच में एक नाबालिग बालिका अकेली और संदिग्ध परिस्थितियों में बैठी मिली। पूछताछ में बालिका ने अपना नाम गंगे टोपनो (लगभग 13 वर्ष) बताया और कहा कि वह अपने घर से बिना परिजनों को जानकारी दिए दिल्ली जाने के उद्देश्य से निकली थी। हालांकि वह अपनी यात्रा के संबंध में स्पष्ट जानकारी नहीं दे सकी।

बालिका की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए आरपीएफ कर्मियों ने उसे अपने संरक्षण में लिया और पूरे समय उसकी निगरानी की। बाद में उसे सुरक्षित रूप से रांची लाया गया। स्टेशन पहुंचने के बाद आवश्यक कानूनी प्रक्रियाएं पूरी कर बालिका को आगे की देखभाल, काउंसलिंग और पुनर्वास संबंधी कार्रवाई के लिए चाइल्डलाइन रांची के सुपुर्द कर दिया गया। इस अभियान में उप निरीक्षक डी.के. मीणा, आरक्षक रामकृष्ण, महिला आरक्षक पिंकी कच्छप और महिला आरक्षक अनुपमा कांजीलाल की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

वहीं दूसरी घटना भी उसी दिन रांची रेलवे स्टेशन पर सामने आई। शाम करीब 7:30 बजे स्टेशन परिसर में नियमित निगरानी के दौरान आरपीएफ पोस्ट रांची के सहायक उप निरीक्षक अरुण कुमार, महिला आरक्षी रेनू और महिला आरक्षी राखी कुमारी ने हटिया छोर स्थित फुट ओवर ब्रिज पर एक किशोरी को संदिग्ध अवस्था में घूमते हुए देखा। पूछताछ के दौरान उसने अपना नाम अमिका कुमारी (लगभग 16 वर्ष) बताया और स्वीकार किया कि वह बिना किसी को बताए अपने घर से निकल आई थी।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए आरपीएफ ने तत्काल चाइल्डलाइन रांची को सूचना दी। चाइल्डलाइन के प्रतिनिधियों के पहुंचने के बाद आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी की गईं और बालिका को सुरक्षित रूप से उनके सुपुर्द कर दिया गया, ताकि उसकी उचित देखभाल, परामर्श और वैधानिक प्रक्रिया सुनिश्चित की जा सके।

आरपीएफ अधिकारियों ने बताया कि “ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते” का उद्देश्य रेलवे परिसरों और ट्रेनों में भटके, लापता अथवा संकटग्रस्त बच्चों की पहचान कर उन्हें सुरक्षित संरक्षण उपलब्ध कराना है। अभियान के तहत आरपीएफ लगातार सतर्कता बरतते हुए बच्चों को सुरक्षित वातावरण प्रदान करने के लिए कार्य कर रही है।

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