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जोहार नाइट ग्रैंड फिनाले: गोपाल मैदान में सजी संस्कृति, नृत्य और ग्लैमर की भव्य शाम

जमशेदपुर: राष्ट्रीय मागे महोत्सव के तहत रविवार शाम बिष्टुपुर स्थित गोपाल मैदान में आयोजित “जोहार नाइट ग्रैंड फिनाले” ने मनोरंजन और सांस्कृतिक उत्सव का नया कीर्तिमान स्थापित किया। देशभर से चयनित 16 श्रेष्ठ डांस टीमों ने अपनी दमदार प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। हर टीम ने अनोखी शैली, तालमेल और ऊर्जा के साथ मंच पर ऐसा प्रदर्शन किया कि हजारों दर्शक दांतों तले उंगली दबाने को मजबूर हो गए।

कार्यक्रम का आकर्षण उस समय और बढ़ गया जब सतरंगी रोशनी से जगमगाते मंच पर क्षेत्रीय फिल्मी सितारों ने अपनी प्रस्तुति दी। उनकी थिरकन ने पूरे माहौल को उत्साह और रोमांच से भर दिया।

आदिवासी समाज की प्रगति पर जोर

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा उपस्थित रहे। उनके साथ पूर्व सांसद गीता कोड़ा, पूर्व केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा, खरसावां के विधायक दशरथ गगराई और जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय भी मौजूद थे।
मधु कोड़ा ने अपने संबोधन में कहा कि आदिवासी समाज हर क्षेत्र में निरंतर आगे बढ़ रहा है और अपनी सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने समाज की एकता और अखंडता बनाए रखने पर विशेष बल दिया।

 

देशभर की प्रतिभाओं का संगम

ग्रैंड फिनाले में खड़गपुर, जमशेदपुर, गुमला, धनबाद, आगरा, दिल्ली, बिहार और मुंबई सहित कई शहरों से प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। डांस रियलिटी शो विजेता स्नेहा चक्रवर्ती ने जज की भूमिका निभाते हुए प्रतिभागियों के प्रदर्शन का मूल्यांकन किया। कार्यक्रम में कला, संगीत और नृत्य का अनूठा संगम देखने को मिला।

पारंपरिक संस्कृति की रंगीन झलक

जोहार ट्रस्ट द्वारा आयोजित इस महोत्सव में 11 राज्यों से आए आदिवासी कलाकारों ने पारंपरिक मागे गीत-संगीत और ‘मागे सुसुन’ की जीवंत प्रस्तुतियां दीं। लोकगीत, पारंपरिक नृत्य और आधुनिक शैली का मिश्रण दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण रहा।

ट्राइबल फूड और हस्तशिल्प का आकर्षण

महोत्सव में ट्राइबल फूड के कई स्टॉल लगाए गए थे, जहां लोगों ने पारंपरिक व्यंजनों का आनंद लिया। इसके साथ ही पारंपरिक परिधान, देसी जड़ी-बूटियां और हस्तनिर्मित वस्तुओं की भी जमकर खरीदारी हुई।

कुल मिलाकर, जोहार नाइट ग्रैंड फिनाले ने न केवल मनोरंजन का शानदार मंच प्रदान किया, बल्कि आदिवासी संस्कृति और परंपराओं को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी साबित हुआ।

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