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इलिगाड़ा में गंगाराम कालुंडिया का 44वां शहादत दिवस मनाया गया, ईचा डैम के खिलाफ आंदोलन जारी रखने का संकल्प

चाईबासा। पश्चिमी सिंहभूम जिला स्थित तांतनगर में गंगाराम कालुंडिया के 44वें शहादत दिवस पर शनिवार को ईचा खरकई बांध विरोधी संघ कोल्हान द्वारा उनके पैतृक गांव इलिगाड़ा में पारंपरिक रीति-रिवाज के साथ श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया।

इस अवसर पर संघ के सदस्यों और ग्रामीणों ने शहीद स्थल पर पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके संघर्षों को याद किया।

कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने गंगाराम कालुंडिया के आंदोलन और उनके योगदान को याद करते हुए उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। वर्ष 1978 से शुरू हुई स्वर्णरेखा बहुउद्देशीय परियोजना के तहत प्रस्तावित ईचा डैम के खिलाफ उन्होंने व्यापक जनआंदोलन चलाया था, जिससे आज तक डैम का निर्माण कार्य पूरा नहीं हो सका है। बताया गया कि इस आंदोलन में उन्होंने 87 गांवों को पूर्ण रूप से और 39 गांवों को आंशिक रूप से एकजुट किया था।

श्रद्धांजलि सभा के बाद संघ के अध्यक्ष बीर सिंह बिरुली ने कहा कि गंगाराम कालुंडिया के नेतृत्व और बलिदान की वजह से ही आज तक डैम का निर्माण नहीं हो पाया है। उनकी शहादत संघ को ईचा डैम को रद्द कराने के लिए लगातार संघर्ष करने की प्रेरणा देती है। उन्होंने कहा कि आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए सभी को एकजुट रहना होगा।

उन्होंने राज्य सरकार की नीतियों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि पहले ईचा डैम को रद्द करने की अनुशंसा की गई थी, लेकिन बाद में डूब क्षेत्र कम कर कुछ गांवों को प्रभावित बताते हुए निर्माण को सहमति दी गई, जिससे ग्रामीणों में नाराजगी है। संघ ने इसे आदिवासी और मूलवासी समुदाय के साथ अन्याय बताया।

कार्यक्रम में सुरेश चंद्र सोय, रेयांस सामड, श्याम कुदादा, रविन्द्र अल्डा, गुलिया कालुंडिया, बिरसा गोडसोरा, गणेश बारी, सुभाष कालुंडिया, मनीला देवगम, संजीत देवगम, जयकिशन बिरुली, गोसा बिरुली, सोना बिरुली, सलूका बारी, लालू कालुंडिया सहित कई लोग मौजूद थे।

संघ ने बताया कि ईचा डैम के खिलाफ जनआंदोलन और न्यायिक लड़ाई आगे भी जारी रहेगी।

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