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Wed. Mar 11th, 2026

उद्योग विभाग की योजनाओं की उपायुक्त चंदन कुमार ने की समीक्षा, लंबित ऋण आवेदनों के शीघ्र निष्पादन का निर्देश

चाईबासा: पश्चिमी सिंहभूम जिला समाहरणालय स्थित सभागार में जिला दंडाधिकारी सह उपायुक्त चंदन कुमार की अध्यक्षता में जिला उद्योग केंद्र चाईबासा द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं एवं कार्यक्रमों की समीक्षात्मक बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिले में चल रही प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना, प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण योजना तथा प्रधानमंत्री रोजगार सृजन योजना की प्रगति की विस्तार से समीक्षा की गई।

बैठक के दौरान उपायुक्त ने योजनाओं से संबंधित अद्यतन प्रतिवेदन का अवलोकन किया। अधिकारियों द्वारा जानकारी दी गई कि प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के तहत जिले में 18 अलग-अलग ट्रेड में कुल 10,162 आवेदन प्राप्त हुए हैं।

इन आवेदनों की तीन चरणों में जांच की जा रही है। जांच के बाद पात्र लाभुकों को उनके संबंधित ट्रेड में प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके साथ ही प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले लाभार्थियों को उनके काम से संबंधित टूलकिट भी उपलब्ध कराई जा रही है।

प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण योजना की समीक्षा के दौरान बताया गया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए जिले को 135 का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके विरुद्ध अब तक कुल 215 आवेदन प्राप्त हुए हैं। इनमें से 30 आवेदनों पर ऋण स्वीकृत किया जा चुका है, जबकि 82 आवेदन जिले के विभिन्न बैंकों में लंबित हैं। इस पर उपायुक्त ने महाप्रबंधक जिला उद्योग केंद्र को निर्देश दिया कि सभी संबंधित बैंकों के प्रबंधकों के साथ समन्वय स्थापित कर लंबित आवेदनों का जल्द निष्पादन सुनिश्चित कराया जाए, ताकि अधिक से अधिक लोगों को योजना का लाभ मिल सके।

प्रधानमंत्री रोजगार सृजन योजना की समीक्षा के दौरान बताया गया कि जिले में कुल 151 आवेदन अनुशंसित किए गए हैं। इनमें से 21 आवेदनों पर ऋण स्वीकृत किया गया है, जबकि 66 आवेदन अभी भी विभिन्न बैंकों में लंबित हैं।

बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि जिले में चिरौंजी उत्पादन इकाई की स्थापना के लिए सोनुआ में कार्य प्रगति पर है। इसके अलावा मुख्यमंत्री लघु एवं कुटीर विकास बोर्ड के अंतर्गत विशेष घटक योजना तथा कौशल उन्नयन योजना के तहत प्रशिक्षणार्थियों को प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है, जिससे स्थानीय लोगों को स्वरोजगार के अवसर मिल सकें।

उपायुक्त ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाई जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि पात्र लाभार्थियों तक योजनाओं का लाभ समय पर पहुंचे।

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