लोहरदगाः जोहार झारखण्ड संकल्प अभियान, लोहरदगा के तत्वावधान में 77वें संविधान दिवस के अवसर पर सोमवार को समाहरणालय के समक्ष बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा के पास संविधान बचाओ–देश बचाओ कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय ट्रेड यूनियन, कर्मचारी सेवा संगठन मंच, किसान समन्वय समिति, प्रार्थना सभा, नवजवान सभा, महिला संगठन तथा वामदलों के प्रतिनिधियों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। कार्यक्रम की शुरुआत सभी प्रतिनिधियों द्वारा बाबा साहब की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित कर की गई। इसके पश्चात भारत के संविधान की प्रस्तावना का सामूहिक पाठ कर संविधान की रक्षा का संकल्प लिया गया।
सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने एसआईआर के नाम पर मतदाताओं के नाम मनमाने ढंग से हटाए जाने पर कड़ा विरोध जताया और इस पर तत्काल रोक लगाने की मांग की। साथ ही बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, किसानों-मजदूरों के शोषण, महिलाओं पर अत्याचार, तथा रेल, भेल, सेल, बंदरगाह जैसे सार्वजनिक उपक्रमों की बिक्री को देशहित के खिलाफ बताया। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि धर्मनिरपेक्षता के नाम पर साम्प्रदायिकता को बढ़ावा दिया जा रहा है और शिक्षा व्यवस्था को कमजोर कर छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। बिना किसी जांच के मुस्लिम स्कूलों को बुलडोजर से गिराए जाने की कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हुए इसे सावित्रीबाई फुले के शिक्षा आंदोलन पर हमला बताया गया। किसानों की तरह मजदूरों पर थोपे जा रहे चार लेबर कोड के विरोध में 12 फरवरी 2026 को प्रस्तावित राष्ट्रव्यापी हड़ताल को सफल बनाने का संकल्प लिया गया। विगत दिनों 27 जनवरी को बैंक कर्मियों की हड़ताल का समर्थन भी किया गया था। सभा में यह भी मांग की गई कि मजदूरों के लिए काम के अधिकार को केवल दिखावा न बनाया जाए और 90 प्रतिशत केंद्र तथा 10 प्रतिशत राज्य के कोष योगदान को बरकरार रखा जाए। वक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि केंद्र सरकार जनविरोधी नीतियों से बाज नहीं आई तो देश की गरीब-गुरबा जनता चुप नहीं बैठेगी, बल्कि देशव्यापी आंदोलन छेड़ेगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी। कार्यक्रम में प्रमुख रूप से महेश कुमार सिंह, जगदीश महतो, बच्चू नारायण सिंह, गोपाल महतो, रामकुमार महतो, उधवा उरांव, माघी उरांव, लालदेव उरांव, भगत, राजकुमार टोप्पो, किसुन दास, मो. जफर आलम, आर. बाबा, दिलमुनी कुजूर, मनीषा उरांव सहित कई सामाजिक-राजनीतिक संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

