जमशेदपुर। मानगो के पारडीह स्थित अघोरेश्वर भगवान राम (ए.बी.आर.) पब्लिक स्कूल, द्वारा समाज के गरीब और वंचित वर्ग के बच्चों के शैक्षणिक एवं व्यक्तित्व विकास को लेकर एक अनुकरणीय पहल की जा रही है। इसी कड़ी में विद्यालय के चयनित विद्यार्थी आगामी 2 फरवरी 2026 को रांची से दिल्ली के लिए हवाई यात्रा पर रवाना होंगे, जबकि 3 फरवरी 2026 की रात्रि में उनकी वापसी निर्धारित है।
इस शैक्षणिक भ्रमण की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि विद्यार्थियों को भारत की राष्ट्रपति महोदया से मिलने का दुर्लभ और गौरवपूर्ण अवसर प्राप्त होगा। इसके साथ ही बच्चे दिल्ली के विभिन्न ऐतिहासिक, शैक्षणिक एवं राष्ट्रीय महत्व के स्थलों का भी भ्रमण करेंगे। इस यात्रा का उद्देश्य विद्यार्थियों को देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था, राष्ट्रीय इतिहास और सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराना तथा उनमें आत्मविश्वास, प्रेरणा और जागरूकता का विकास करना है।
इस महत्वाकांक्षी कार्यक्रम के आयोजन में राउंड टेबल इंडिया का उल्लेखनीय सहयोग मिल रहा है। गौरतलब है कि ए.बी.आर. पब्लिक स्कूल, श्री सर्वेश्वरी समूह के अंतर्गत संचालित है, जिसका मूल केंद्र अवधूत भगवान राम कुष्ठ सेवा आश्रम, पड़ाव, वाराणसी (उत्तर प्रदेश) है। यह संस्था विश्व में सर्वाधिक कुष्ठ रोगियों को स्वास्थ्य लाभ प्रदान करने के लिए गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड और लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में सम्मानित हो चुकी है। इसके अलावा सामाजिक, आर्थिक एवं शैक्षणिक क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान के लिए संस्था को पंडित रविशंकर शुक्ल सम्मान सहित अनेक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हुए हैं। देशभर में संस्था की सैकड़ों शाखाएँ सक्रिय रूप से समाज सेवा के कार्यों में संलग्न हैं।
विद्यालय में वर्तमान समय में सिमडेगा जिले के पाँच आदिवासी विद्यार्थी निःशुल्क शिक्षा के साथ-साथ आवास, भोजन और वस्त्र की सुविधा प्राप्त कर अध्ययन कर रहे हैं। वहीं, विद्यालय द्वारा सभी वर्गों के बच्चों को लाभ-रहित शुल्क पर आधुनिक सुविधाओं से युक्त, कंप्यूटर एवं स्मार्ट क्लास आधारित गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है।
अघोरेश्वर भगवान राम (ए.बी.आर.) पब्लिक स्कूल के
अवैतनिक प्राचार्य प्रमोद कुमार ने गुरुवार को बताया कि दिल्ली भ्रमण पर जाने वाले विद्यार्थियों में शिक्षिका अदिति पांडेय (25 वर्ष) के साथ उर्मी मुर्मू (11 वर्ष), पल्लवी कुमारी नाग (12 वर्ष), अंबालिका महतो (12 वर्ष), शुभम मिश्रा (12 वर्ष) और प्रियंशु दास (13 वर्ष) शामिल हैं। विद्यालय की यह पहल वंचित वर्ग के बच्चों को आगे बढ़ने का अवसर देने और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक प्रेरणास्पद और सराहनीय प्रयास के रूप में देखी जा रही है।

