जमशेदपुर। झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने कहा है कि विश्वविद्यालय और कॉलेज केवल शिक्षा देने तक सीमित न रहें, बल्कि समाज की जटिल समस्याओं के समाधान खोजने वाले केंद्र के रूप में विकसित हों। बदलते पर्यावरण, बढ़ते प्रदूषण और उससे उत्पन्न नई चुनौतियों पर गंभीर शोध की आवश्यकता है, ताकि मानव जीवन पर पड़ रहे प्रतिकूल प्रभावों को कम किया जा सके।
राज्यपाल गुरुवार को जमशेदपुर को-ऑपरेटिव कॉलेज द्वारा आयोजित 48वें इनवायरमेंटल म्यूटाजेन सोसाइटी ऑफ इंडिया (EMSI) की वार्षिक बैठक सह अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार का उद्घाटन कर रहे थे। यह कार्यक्रम बिष्टुपुर स्थित एक्सएलआरआई ऑडिटोरियम में आयोजित हुआ। इस अवसर पर कोल्हान विश्वविद्यालय की कुलपति अंजलि गुप्ता, को-ऑपरेटिव कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अमर सिंह सहित बड़ी संख्या में शिक्षक, वैज्ञानिक और शोधकर्ता उपस्थित रहे।
अपने संबोधन में राज्यपाल ने कहा कि तेजी से बढ़ते औद्योगीकरण और शहरीकरण के कारण प्रदूषण एक गंभीर समस्या बन चुका है, जिसका सीधा असर मानव स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। उन्होंने दिल्ली जैसे महानगरों का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां के लोग प्रदूषण के दुष्परिणामों को रोजाना झेल रहे हैं। ऐसे में पर्यावरण और स्वास्थ्य से जुड़े विषयों पर आयोजित यह अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार बेहद प्रासंगिक और महत्वपूर्ण है।
उन्होंने बताया कि सेमिनार में आनुवांशिक गुणों में परिवर्तन, डीएनए की प्रकृति और उसके स्वास्थ्य व पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव जैसे विषयों पर चर्चा की जा रही है। पर्यावरणीय समस्याओं और बढ़ते प्रदूषण से उत्पन्न चुनौतियों के समाधान पर जो निष्कर्ष सामने आएंगे, वे मानव कल्याण में सहायक होंगे।
राज्यपाल ने वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं से आह्वान किया कि वे अपने ज्ञान और अनुसंधान को समाज के व्यापक हित में उपयोग करें। उन्होंने कहा कि झारखंड के विश्वविद्यालयों में शोध के क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण प्रयास हो रहे हैं और इन्हें और मजबूत करने की आवश्यकता है। प्रधानमंत्री के विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए स्वस्थ समाज और स्वच्छ पर्यावरण अनिवार्य है, जिसमें शोध की अहम भूमिका है।
सेमिनार में EMSI की अध्यक्ष वाणी प्रिया गांगुली ने संस्था का परिचय देते हुए बताया कि इससे राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर के वैज्ञानिक जुड़े हुए हैं, जो पर्यावरण और स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं के समाधान पर लगातार कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन से शिक्षा, स्वास्थ्य और शोध के क्षेत्र में एक नया अध्याय जुड़ेगा। पर्यावरण, जैव विविधता और डीएनए में हो रहे बदलावों को समझने का अवसर मिलेगा और नई चुनौतियों के तकनीकी समाधान खोजने में यह सेमिनार मील का पत्थर साबित होगा।

