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Sat. Feb 7th, 2026

सारंडा जंगल में सुरक्षाबलों की बड़ी कार्रवाई, एक करोड़ के इनामी माओवादी अनल समेत 11 से अधिक नक्सली ढेर

चाईबासा। पश्चिमी सिंहभूम जिले के छोटानगरा थाना क्षेत्र अंतर्गत सारंडा जंगल में गुरुवार सुबह सुरक्षाबलों और प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) संगठन के बीच हुई भीषण मुठभेड़ में सुरक्षाबलों को ऐतिहासिक सफलता हाथ लगी है। इस मुठभेड़ में माओवादियों के शीर्ष नेता और एक करोड़ रुपये के इनामी कुख्यात नक्सली पतिराम मांझी उर्फ अनल दा मारा गया है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार इस ऑपरेशन में कुल 11 से अधिक नक्सलियों के मारे जाने की खबर है, हालांकि आधिकारिक पुष्टि अभी जारी है।

जानकारी के मुताबिक, सीआरपीएफ, कोबरा बटालियन, झारखंड जगुआर और जिला पुलिस को सारंडा क्षेत्र में माओवादियों की बड़ी मौजूदगी को लेकर सटीक गुप्त सूचना मिली थी। इसी इनपुट के आधार पर सुरक्षाबलों की एक संयुक्त टीम ने सघन सर्च ऑपरेशन शुरू किया। जैसे ही जवान चिह्नित इलाके में पहुंचे, पहले से घात लगाए बैठे नक्सलियों ने खुद को घिरा देख अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में सुरक्षाबलों ने मोर्चा संभालते हुए मोर्चाबंदी की और दोनों ओर से कई घंटे तक भीषण गोलीबारी होती रही। इस मुठभेड़ में सुरक्षाबलों का पलड़ा भारी रहा।

इस ऑपरेशन में कोबरा-209 बटालियन की सीधी भिड़ंत माओवादियों से हुई, जिसमें भाकपा (माओवादी) का सेंट्रल कमेटी मेंबर (सीसीएम) अनल ढेर हो गया। अनल कई नामों से जाना जाता था, जिनमें तुफान, पतिराम मांझी, पतिराम मरांडी और रमेश शामिल हैं। वह गिरिडीह जिले के पीरटांड थाना क्षेत्र अंतर्गत झरहाबाले गांव का निवासी था और लंबे समय से सारंडा व गिरिडीह के जंगलों में माओवादी गतिविधियों का संचालन कर रहा था। अनल पर हत्या, आईईडी ब्लास्ट, हथियार लूट और सुरक्षाबलों पर हमले जैसे दर्जनों गंभीर मामले दर्ज थे और वह सरकार की मोस्ट वांटेड सूची में शामिल था।

मुठभेड़ के दौरान भारी नुकसान उठाने के बाद कुछ नक्सली घने जंगलों की आड़ लेकर भागने में सफल रहे। इसके बाद पूरे इलाके में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है। अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती के साथ जंगलों में सघन सर्च ऑपरेशन जारी है, ताकि फरार नक्सलियों की तलाश की जा सके और किसी भी संभावित खतरे को रोका जा सके।

सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अनल के मारे जाने से माओवादी संगठन को बड़ा झटका लगा है। कोल्हान और सारंडा क्षेत्र में नक्सल नेटवर्क को इससे गहरी क्षति पहुंची है। उल्लेखनीय है कि सारंडा और कोल्हान का इलाका लंबे समय से नक्सलियों का गढ़ माना जाता रहा है, जहां मिसिर बेसरा, अनल दा, अनमोल, मोछु, अजय महतो, असीम मंडल, सागेन अंगरिया, अश्विन, पिंटु लोहरा, चंदन लोहरा, अमित हांसदा उर्फ अपटन, जयकांत और रापा मुंडा जैसे कई बड़े नक्सली अपने दस्तों के साथ सक्रिय रहे हैं। सुरक्षाबलों की इस कार्रवाई को झारखंड में नक्सल विरोधी अभियान की अब तक की सबसे बड़ी और निर्णायक सफलताओं में से एक माना जा रहा है।

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