जमशेदपुर: ब्रह्मर्षि विकास मंच, जमशेदपुर में अध्यक्ष एवं महासचिव पदों पर हाल ही में की गई घोषणा को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। संस्था के कई दावेदारों ने पूरी चयन प्रक्रिया को अलोकतांत्रिक और अवैध बताते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया है।
रिश्तेदारों को पद सौंपने का आरोप
विरोध कर रहे उम्मीदवारों का आरोप है कि मंच में किसी प्रकार का पारदर्शी चुनाव नहीं कराया गया, बल्कि मनमाने ढंग से मनोनयन कर दिया गया। उनका कहना है कि पूर्व अध्यक्ष और पूर्व महासचिव ने आपसी मिलीभगत कर अपने-अपने रिश्तेदारों को ही महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्त कर दिया, जिससे संस्था की कमान उन्हीं के हाथों में बनी रहे।
समाज को वोट बैंक बनाने की साजिश का आरोप
उम्मीदवारों ने संयुक्त बयान जारी कर कहा कि बाहरी असामाजिक तत्वों के प्रभाव में समाज को बांटने की कोशिश की जा रही है। उनका आरोप है कि यह पूरी प्रक्रिया राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को साधने के उद्देश्य से की गई है, ताकि ब्रह्मर्षि समाज को केवल एक वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किया जा सके।
दावेदारों का कहना है कि उन्हें न तो चुनाव प्रक्रिया की कोई सूचना दी गई और न ही रायशुमारी कराई गई। यहां तक कि संचालन समिति ने उनसे मिलने से भी इनकार कर दिया।
लोकतांत्रिक चुनाव की मांग
विरोध जता रहे पवन सिंह, सत्येंद्र सिंह, राजेश सिंह, अनीस सिंह, रवि नंदन, मिथिलेश चौधरी, जय कुमार और विनोद शुक्ला ने समाज के लोगों से एकजुट होकर इस निर्णय का विरोध करने की अपील की है। उनका कहना है कि घोषणा से पहले किसी भी दावेदार को विश्वास में नहीं लिया गया।
उन्होंने मांग की कि भविष्य में मंच में लोकतांत्रिक तरीके से पारदर्शी चुनाव कराए जाएं और ऐसे नेतृत्व का चयन हो, जो समाज के विकास के लिए स्पष्ट दृष्टिकोण और ठोस योजना रखता हो। उम्मीदवारों का तर्क है कि वर्तमान नियुक्तियां संस्था के उद्देश्य को कमजोर करेंगी और समाज के हितों को नुकसान पहुंचा सकती हैं।

