जमशेदपुर। पूर्वी सिंहभूम जिले के बोड़ाम थाना क्षेत्र अंतर्गत बेलडीह पंचायत के जोबा गांव में सोमवार को आयोजित अवैध काड़ा (भैंसा) लड़ाई प्रतियोगिता एक परिवार के लिए काल बन गई। फुटबॉल मैदान में चल रही भैंसों की लड़ाई के दौरान उग्र भैंसा के हमले से एक अधेड़ व्यक्ति की मौके पर गंभीर हालत हो गई, जिसकी बाद में अस्पताल में मौत हो गई, जबकि उनका नाबालिग बेटा गंभीर रूप से घायल हो गया।
घटना सोमवार दोपहर करीब एक बजे की है। बताया जाता है कि जोबा गांव के फुटबॉल मैदान में युवा कमेटी की ओर से काड़ा लड़ाई का आयोजन किया गया था, जिसमें कई गांवों से लोग जुटे थे। चार जोड़े की भैंसों की लड़ाई संपन्न हो चुकी थी और पांचवें मुकाबले के दौरान एक भैंसा अचानक बेकाबू हो गया। उसने दूसरे भैंसा को दौड़ाते हुए मैदान के बाहर खदेड़ दिया। इसी दौरान भागते हुए उग्र भैंसा ने दर्शकों में खड़े जोबा गांव निवासी सुभाष कर्मकार (55) पर हमला कर दिया। भैंसा ने उन्हें सींग पर उठाकर जमीन पर पटक दिया और साथ ही उनके बेटे सागर कर्मकार (15) को भी निशाना बनाया।
हमले में सुभाष कर्मकार गंभीर रूप से घायल हो गए, जबकि उनके बेटे सागर के पैर में गंभीर चोट आई और एक पैर की हड्डी टूट गई। घटना के बाद अफरा-तफरी मच गई, लेकिन हैरानी की बात यह रही कि घटना के बाद भी मेला कुछ देर तक जारी रहा और दो जोड़े की भैंसों की लड़ाई कराई गई। बाद में सूचना मिलने पर बोड़ाम पुलिस करीब ढाई बजे घटनास्थल पर पहुंची और भीड़ को खदेड़ते हुए मेला को तत्काल बंद कराया।
घायल पिता-पुत्र को स्थानीय लोगों की मदद से एमजीएम अस्पताल पहुंचाया गया, जहां इलाज के दौरान सुभाष कर्मकार ने दम तोड़ दिया। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए एमजीएम मेडिकल कॉलेज भेजा और प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया। अचानक हुई इस दर्दनाक घटना से गांव में मातम पसरा हुआ है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
इस मामले में बोड़ाम थाना प्रभारी मनोरंजन कुमार ने बताया कि पुलिस को मेला आयोजन की कोई पूर्व सूचना नहीं दी गई थी और गुप्त तरीके से काड़ा लड़ाई का आयोजन किया गया था। उन्होंने कहा कि मेला कमेटी और आयोजन से जुड़े लोगों की पहचान की जा रही है तथा मामले की जांच की जा रही है।
जानकार बताते हैं कि झारखंड समेत पूरे देश में भैंसा लड़ाई पर प्रतिबंध है और प्रशासन द्वारा इसकी अनुमति नहीं दी जाती। इसके बावजूद पटमदा, कमलपुर और बोड़ाम थाना क्षेत्र सहित पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती गांवों में चोरी-छिपे ऐसे आयोजन लगातार होते रहे हैं। आयोजनकर्ताओं द्वारा न तो कोई पर्चा छपवाया जाता है और न ही खुले तौर पर प्रचार किया जाता है, बल्कि यूट्यूब चैनलों और सोशल मीडिया प्लेटफार्म के माध्यम से सीमित लोगों को सूचना दी जाती है। अधिकांश आयोजन ऐसे स्थानों पर किए जाते हैं जो दो थाना क्षेत्रों या दो राज्यों की सीमा के पास होते हैं, ताकि प्रशासन की नजर से बचा जा सके। सोमवार को जिस स्थान पर मेला आयोजित हुआ, वह पटमदा थाना क्षेत्र के लेकड़ो गांव से सटा हुआ है, हालांकि प्रशासनिक रूप से वह बोड़ाम थाना क्षेत्र में आता है।
अब इस घटना के बाद प्रशासन की भूमिका और अवैध काड़ा लड़ाई पर रोक को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं।

