पत्रकार सुरक्षा कानून पर अन्य जिलों में खामोशी क्यो?-प्रीतम भाटिया
राँचीःराज्य में लगातार पत्रकारों के साथ हो रहे अन्याय और हमले को लेकर जहां एक ओर अधिकांश जिलों में आए दिन रोष मार्च निकाले जा रहें हैं तो वहीं कई जिलों में सन्नाटा भी पसरा हुआ है.कई जिले तो ऐसे हैं जहां स्थानीय स्तर पर पत्रकारों ने जोरदार प्रदर्शन कर पूरे राज्य को संदेश देने का काम किया है तो वहीं कुछ ऐसे जिले भी हैं जहां पत्रकारों पर हमले को लेकर किसी तरह का कोई बयान तक जारी नहीं हुआ है.
कुछ ऐसे भी जिले हैं जहां धरना- प्रदर्शन तो हुआ लेकिन वहाँ मांग केवल बैजनाथ महतो के हमलावरों की गिरफ्तारी तक ही सीमित होकर रह गई.धरने पर बैठे वे लोग चाहते तो पत्रकार सुरक्षा कानून और अन्य जिलों में हो रहे हमलों का भी विरोध कर सकते थे.
श्री भाटिया ने कहा कि माना पत्रकार गुटों में बँटें हुए हैं लेकिन अब वह समय नहीं रह गया है जब गुटबाजी को पत्रकारिता पर हावी होने दिया जाए.उन्होंने कहा कि एसोसिएशन सभी पत्रकार संगठनों के साथ है और जो मुखर होकर पत्रकारहित की आवाज उठाएंगे हम उनका खुला समर्थन करेंगे.
श्री भाटिया ने AISMJWA को झारखंड में पत्रकारहित में अब तक का सबसे बड़ा विकल्प बताते हुए कहा है कि एसोसिएशन राज्य में लगातार सक्रिय है और सक्रिय रहेगा उन्होंने कहा कि जब तक राज्य में पत्रकार सुरक्षा कानून लागू नहीं होगा तब तक हम किसी न किसी जिले में एसोसिएशन के बैनर तले पत्रकार साथियों का रोष मार्च जारी रखेंगे.
*उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को पत्रकारों के लिए सुरक्षा कानून लाने की जरूरत है और अगर केंद्र सरकार सुरक्षा कानून लाती है तो उसे सभी राज्यों में लागू करना भी जरूरी हो जाएगा.*

