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जनजातीय युवाओं को नौकरी तलाशने वाला नहीं, रोजगार देने वाला उद्यमी बनना चाहिए : वैद्यनाथ मांडी

जमशेदपुर। जनजातीय समाज के युवाओं को केवल नौकरी पाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें उद्यमिता के क्षेत्र में आगे बढ़कर रोजगार सृजन करने वाला बनना चाहिए। आत्मविश्वास, दृढ़ इच्छाशक्ति और सही दिशा में प्रयास से छोटे व्यवसाय को भी बड़े उद्यम में बदला जा सकता है। यह बात बुधवार को सीएसआईआर-राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला (एनएमएल), जमशेदपुर में आयोजित जनजातीय गौरव दिवस समारोह में मुख्य अतिथि एवं ट्राइबल इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (टीआईसीसीआई), झारखंड के प्रदेश अध्यक्ष वैद्यनाथ मांडी ने कही।

उन्होंने जनजातीय युवाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने पर जोर देते हुए कहा कि टीआईसीसीआई जनजातीय उद्यमियों को व्यवसाय स्थापित करने और उसका विस्तार करने में हरसंभव सहयोग प्रदान करता है। इसके तहत सरकारी योजनाओं का लाभ लेने, एमएसएमई पंजीकरण, जीएसटी, लाइसेंस और आवश्यक दस्तावेजी प्रक्रियाओं में मार्गदर्शन दिया जाता है। उन्होंने कहा कि जनजातीय युवा अपने पारंपरिक ज्ञान, कौशल और स्थानीय उत्पादों को व्यवसाय का आधार बनाकर व्यापक बाजार में अपनी पहचान बना सकते हैं। इससे न केवल उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, बल्कि समाज के अन्य लोगों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा होंगे।

वैद्यनाथ मांडी ने एक छोटे चाय विक्रेता के सफल उद्यमी बनने का उदाहरण देते हुए कहा कि सफलता के लिए बड़े संसाधनों से ज्यादा मजबूत इच्छाशक्ति और सकारात्मक सोच जरूरी है। युवाओं को डर, आत्मसंदेह, नकारात्मक विचार, भाग्य के भरोसे रहने और समय की कमी जैसे बहानों से बाहर निकलना होगा। उन्होंने जनजातीय युवाओं से अपनी क्षमता पर विश्वास कर उद्यमिता की दिशा में कदम बढ़ाने का आह्वान किया।

सीएसआईआर-एनएमएल के निदेशक डॉ. संदीप घोष चौधरी ने अतिथियों और विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए कहा कि जनजातीय गौरव दिवस भगवान बिरसा मुंडा सहित उन तमाम जनजातीय स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष, बलिदान और योगदान को सम्मान देने का अवसर है, जिन्होंने देश की आजादी के आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज की सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं का संरक्षण करने के साथ शिक्षा, सामाजिक न्याय तथा जल-जंगल-जमीन की रक्षा के प्रति भी सजग रहना जरूरी है। भगवान बिरसा मुंडा के आदर्शों को शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण और समावेशी विकास के माध्यम से आगे बढ़ाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

कार्यक्रम में डॉ. पारिक्षित मुंडा ने जनजातीय गौरव, अस्मिता और सशक्तिकरण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए समारोह की रूपरेखा प्रस्तुत की। वहीं, सीएसआईआर-एनएमएल के मुख्य वैज्ञानिक एवं एससी-एसटी संपर्क अधिकारी डॉ. मनोज एम. ह्यूमेन ने जनजातीय समुदायों के अधिकारों, संवैधानिक प्रावधानों और विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध शैक्षणिक अवसरों की जानकारी दी। संस्थान के नियंत्रक प्रशासन जय शंकर शरण ने केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं से अवगत कराया।

समारोह में कुल 144 जनजातीय विद्यार्थियों ने भाग लिया, जिनमें 69 बालक और 75 बालिकाएं शामिल थीं। उनके साथ सात शिक्षक एवं विद्यालय प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दूसरे सत्र में विद्यार्थियों को सीएसआईआर-एनएमएल की अनुसंधान एवं विकास प्रयोगशालाओं का भ्रमण कराया गया। इस दौरान उन्हें खनिज, धातु और पदार्थ विज्ञान के क्षेत्र में चल रहे शोध कार्यों की जानकारी दी गई, ताकि उनमें विज्ञान, अनुसंधान और नवाचार के प्रति रुचि विकसित हो सके। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं वंदे मातरम् के गायन से हुआ। अंत में संयोजक डॉ. कृष्ण कुमार ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

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