इंदौर.किसी अपने को खोने का दुख कभी कम नहीं होता, लेकिन दुख की इसी घड़ी में लिया गया एक फैसला किसी दूसरे परिवार के जीवन में खुशियां लौटा सकता है। अंगदान एक ऐसी ही नेक पहल है, जिसके जरिए मृत्यु के बाद भी किसी व्यक्ति के अंग जरूरतमंद लोगों को नया जीवन दे सकते हैं। ऐसे ही परिवारों के त्याग, साहस और मानवता को सम्मान देने के लिए संस्था 2030 का भारत की ओर से 28 नवंबर को ‘जीवनदाता परिवार सम्मान 2026’ का आयोजन किया जाएगा।
इस कार्यक्रम के जरिए उन परिवारों को सम्मानित किया जाएगा, जिन्होंने अपने किसी प्रियजन को खोने के बाद भी उसके अंग या टिश्यू दान करने का फैसला लिया और दूसरे लोगों को नई जिंदगी मिलने का रास्ता बनाया। इसके अलावा अंगदान के प्रति लोगों को जागरूक करने वाले व्यक्तियों और इस कार्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले डॉक्टरों व स्वास्थ्यकर्मियों को भी सम्मानित किया जाएगा।
कार्यक्रम में तीन श्रेणियों में सम्मान दिए जाएंगे। पहली श्रेणी ‘जीवनदाता परिवार सम्मान’ उन परिवारों के लिए है, जिन्होंने अपने प्रियजन के निधन के बाद उसके अंग या टिश्यू दान करने की सहमति दी। दूसरी श्रेणी ‘जीवन प्रेरणा सम्मान’ उन व्यक्तियों और परिवारों को दी जाएगी, जिन्होंने अंगदान के प्रति जागरूकता फैलाने, लोगों को सही जानकारी देने और उन्हें इस नेक काम के लिए प्रेरित करने में अहम भूमिका निभाई है। वहीं, तीसरी श्रेणी ‘जीवन सारथी सम्मान’ के तहत अंगदान और अंग प्रत्यारोपण की प्रक्रिया में योगदान देने वाले डॉक्टरों, सर्जनों, ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर्स, काउंसलर्स और स्वास्थ्यकर्मियों को सम्मानित किया जाएगा।
संस्था के संस्थापक डॉ. अतुल मलिकराम ने कहा कि किसी अपने को खोने का दर्द बहुत गहरा होता है, लेकिन ऐसे परिवार जो इस दुख के बावजूद किसी दूसरे की जान बचाने का फैसला लेते हैं, वे मानवता की सच्ची मिसाल हैं। उन्होंने कहा कि इस आयोजन का उद्देश्य केवल इन परिवारों को सम्मानित करना नहीं, बल्कि उनके साहस और संवेदनशीलता की कहानियों को समाज तक पहुंचाना भी है। इससे लोगों में अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ेगी और वे इसके महत्व को समझ सकेंगे। उन्होंने कहा कि जरूरत है कि हर घर में अंगदान को लेकर बातचीत हो, ताकि लोग इससे जुड़ी सही जानकारी प्राप्त कर सकें और समय आने पर जागरूकता के साथ निर्णय ले सकें।
संस्था का मानना है कि अंगदान सिर्फ एक चिकित्सकीय प्रक्रिया नहीं, बल्कि मानवता और सामाजिक जिम्मेदारी से जुड़ा विषय है। आज भी समाज में अंगदान को लेकर कई तरह की भ्रांतियां और जानकारी का अभाव है। ऐसे में लोगों को सही जानकारी देना और इस विषय पर खुलकर बातचीत को बढ़ावा देना जरूरी है।
‘जीवनदाता परिवार सम्मान 2026’ के माध्यम से 2030 का भारत अंगदान से जुड़ी प्रेरणादायक कहानियों को सामने लाना चाहता है, ताकि दूसरे लोग भी इससे प्रेरित हों। साथ ही अंगदान और प्रत्यारोपण के क्षेत्र में काम करने वाले चिकित्सा कर्मियों के योगदान को भी पहचान मिल सके। यह आयोजन उन लोगों और परिवारों के प्रति आभार जताने का एक प्रयास है, जिनके फैसले से किसी जरूरतमंद को जीवन की नई उम्मीद मिली।
2030 का भारत के बारे में
2030 का भारत इंदौर स्थित एक सामाजिक संस्था है, जो समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए काम कर रही है। संस्था शिक्षा, आजीविका, सामाजिक एवं सामुदायिक विकास और जन-जागरूकता जैसे क्षेत्रों में सक्रिय है। इसका उद्देश्य जरूरतमंद लोगों और समुदायों तक शिक्षा, अवसर और जरूरी संसाधन पहुंचाकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। संस्था संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए भी विभिन्न सामाजिक कार्यों में योगदान दे रही है। संस्था का मानना है कि बेहतर शिक्षा, समान अवसर और सामूहिक प्रयासों से ही एक सशक्त, आत्मनिर्भर और विकसित भारत का निर्माण किया जा सकता है।

