जमशेदपुर। आजसू पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव हरेलाल महतो के पार्टी छोड़ने के बाद संगठन के भीतर किसी तरह की बेचैनी से केंद्रीय सचिव चंद्रगुप्त सिंह ने इनकार किया है। बुधवार को उन्होंने कहा कि राजनीति में नेताओं का आना-जाना लगा रहता है। हरेलाल महतो के पार्टी से अलग होने से आजसू पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा कि पार्टी में आगे भी कई नेता आएंगे और कई नेता अलग रास्ता चुन सकते हैं, लेकिन इससे संगठन की विचारधारा और कार्यकर्ताओं की सक्रियता प्रभावित नहीं होगी।
चंद्रगुप्त सिंह ने हरेलाल महतो के पार्टी छोड़ने के फैसले पर कहा कि संभव है कि उन्हें किसी दूसरे राजनीतिक मंच पर अपना भविष्य अधिक सुरक्षित नजर आया हो। इसी वजह से उन्होंने आजसू से अलग होने का निर्णय लिया होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी अपने संगठन और राजनीतिक गतिविधियों को लेकर आगे भी मजबूती से काम करती रहेगी।
आजसू के भाजपा में विलय की चर्चाओं पर चंद्रगुप्त सिंह ने कहा कि उन्हें इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है। हालांकि उन्होंने कहा कि यदि भविष्य में पार्टी का किसी राजनीतिक दल में विलय होता भी है तो वह खुद सामान्य कार्यकर्ता की भूमिका में रहकर संगठन की सेवा करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि उनके लिए पद से अधिक महत्वपूर्ण पार्टी और संगठन के प्रति निष्ठा है।
अपने राजनीतिक सफर का उल्लेख करते हुए चंद्रगुप्त सिंह ने कहा कि वह वर्ष 1973 से लगातार राजनीति में सक्रिय हैं। राजनीतिक जीवन में जिस भी दल या स्थान पर रहे, वहां पूरी निष्ठा के साथ अपनी जिम्मेदारी निभाई है। उन्होंने कहा कि अब उनकी विधायक या सांसद बनने की कोई महत्वाकांक्षा नहीं है।
जमशेदपुर पूर्वी विधानसभा से चुनाव लड़ने की अपनी पुरानी इच्छा पर उन्होंने कहा कि यह पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास का क्षेत्र रहा है। रघुवर दास की पुत्रवधू के विधायक होने के कारण उन्होंने अपनी चुनावी इच्छा को अब छोड़ दिया है। उन्होंने कहा कि वर्तमान स्थिति में जहां हैं, वहां उन्हें सम्मान मिल रहा है और अब किसी राजनीतिक पद की इच्छा नहीं है।
राज्य की कानून-व्यवस्था पर चिंता जताते हुए चंद्रगुप्त सिंह ने इसके पीछे बेरोजगारी और युवाओं में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति को प्रमुख कारण बताया। उन्होंने कहा कि रोजगार के पर्याप्त अवसर नहीं मिलने से बड़ी संख्या में युवा अपराध की ओर बढ़ रहे हैं और नशे की गिरफ्त में भी आ रहे हैं। इसका असर परिवार और समाज दोनों पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि कई युवा अपने माता-पिता की बात तक नहीं मान रहे हैं। राज्य में रोजगार के अवसर बढ़ाने, बेरोजगारी दूर करने और विकास की गति तेज करने पर सरकार को प्राथमिकता देनी चाहिए। उनके अनुसार रोजगार और विकास की स्थिति सुधरेगी तो कानून-व्यवस्था में भी सुधार आएगा।

