चाईबासा: चक्रधरपुर प्रखंड के टोकलो थाना क्षेत्र से करीब 17 किलोमीटर दूर सुदूर लौजोडा कला गांव में इस वर्ष भी पारंपरिक तरीके से दुर्गा पूजा का आयोजन किया जाएगा। श्री श्री सार्वजनिक दुर्गा पूजा समिति लौजोडा कला की ओर से पूजा की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। इस वर्ष यहां पूजा पंडाल का निर्माण किया जाएगा और 18 एवं 19 अक्टूबर को क्षेत्रीय कलाकारों द्वारा रातभर सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
लौजोडा कला में वर्ष 1972 से लगातार दुर्गा पूजा की परंपरा चली आ रही है। बताया गया कि समिति के संरक्षक रामलाल मुंडा के पूर्वजों द्वारा वर्ष 1972 में पूजा की शुरुआत की गई थी। तब से ग्रामीण मिल-जुलकर पूजा का आयोजन करते आ रहे हैं। पूजा के दौरान कलश यात्रा भी निकाली जाती है, जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल होते हैं।
पूजा समिति के अध्यक्ष हाथीराम मुंडा, सचिव अर्जुन मुंडा, उपाध्यक्ष हराधन मुंडा और कोषाध्यक्ष अनिल मुंडा के नेतृत्व में इस वर्ष के आयोजन की तैयारियां की जा रही हैं। पूजा को लेकर ग्रामीणों में उत्साह है। दुर्गम क्षेत्र होने के बावजूद प्रत्येक वर्ष यहां आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग पूजा देखने और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में शामिल होने पहुंचते हैं।
समिति के संरक्षक रामलाल मुंडा ने कहा कि लौजोडा कला में दुर्गा पूजा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि गांव और आसपास के क्षेत्र के लोगों को एक साथ जोड़ने वाली परंपरा है। उनके पूर्वजों ने वर्ष 1972 में इसकी शुरुआत की थी और तब से ग्रामीणों के सहयोग से यह परंपरा लगातार आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष भी पूजा को पारंपरिक तरीके से आयोजित करने के साथ पंडाल का निर्माण कराया जा रहा है। 18 और 19 अक्टूबर की रात क्षेत्रीय कलाकारों के सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे, जिसमें आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की उम्मीद है।
उन्होंने कहा कि आयोजन में ग्रामीणों की भागीदारी सबसे महत्वपूर्ण है। सभी के सहयोग से पूजा को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराया जाएगा। समिति की ओर से पूजा, कलश यात्रा और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की तैयारियां लगातार की जा रही हैं।

