जमशेदपुर। पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन ने मंगलवार को विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर झामुमो और कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि इस प्रक्रिया को लेकर लोगों के बीच भ्रम फैलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि एसआईआर को राजनीतिक चश्मे से देखने के बजाय संविधान और मतदाता सूची की शुद्धता के संदर्भ में समझने की जरूरत है। उनके मुताबिक मतदाता सूची में वास्तविक मतदाताओं के नाम सुरक्षित रखते हुए मृत, डुप्लीकेट, स्थानांतरित और अपात्र प्रविष्टियों की पहचान करना जरूरी है।
चंपाई सोरेन ने कहा कि झारखंड में आदिवासी समाज लंबे समय से जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए संघर्ष करता रहा है। उन्होंने दावा किया कि राज्य में आदिवासी आबादी के अनुपात में कमी आई है और इसके पीछे कई सामाजिक एवं जनसांख्यिकीय कारणों के साथ घुसपैठ भी एक गंभीर मुद्दा है। उन्होंने संताल परगना के पाकुड़, साहिबगंज और राजमहल क्षेत्रों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन इलाकों में जमीन पर अवैध कब्जे और फर्जी दस्तावेजों से संबंधित शिकायतों की जांच होनी चाहिए।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि सीएनटी और एसपीटी कानूनों के बावजूद आदिवासी जमीन की सुरक्षा को लेकर सवाल उठते रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कई स्थानों पर जमीन के स्वरूप में बदलाव हुआ है और स्थानीय आदिवासी-मूलवासी परिवारों के सामने विस्थापन जैसी स्थिति पैदा हुई है। उन्होंने कहा कि सरकार और प्रशासन को ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लानी चाहिए।
चंपाई सोरेन ने पूर्वी सिंहभूम के चाकुलिया में फर्जी जन्म प्रमाण पत्र से जुड़े मामले का भी जिक्र किया। उन्होंने सरायकेला-खरसावां के कपाली क्षेत्र की मतदाता सूची में पिछले वर्षों के दौरान हुए बदलाव का उल्लेख करते हुए सवाल उठाया कि बड़ी संख्या में नए मतदाताओं के नाम किस आधार पर जुड़े और इसके पीछे की वास्तविक स्थिति क्या है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों की जांच तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि एसआईआर का उद्देश्य किसी जाति, धर्म या समुदाय को निशाना बनाना नहीं है। यह मतदाता सूची को अधिक विश्वसनीय और पारदर्शी बनाने की निर्वाचन प्रक्रिया का हिस्सा है। यदि किसी योग्य नागरिक का नाम सूची में नहीं है तो उसे निर्धारित प्रक्रिया के तहत दावा और आपत्ति दाखिल करने का अधिकार है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे एसआईआर से जुड़ी जानकारी हासिल करें और अपने नाम तथा परिवार के सदस्यों के नाम मतदाता सूची में सही तरीके से दर्ज होने की पुष्टि करें।
चंपाई सोरेन ने कहा कि झारखंड में एसआईआर को लेकर राजनीतिक बयानबाजी से ज्यादा जरूरी लोगों को जागरूक करना है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में मतदाता सूची की शुद्धता महत्वपूर्ण है और वास्तविक नागरिकों के मताधिकार की रक्षा के साथ अपात्र प्रविष्टियों की पहचान भी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि झारखंड के जल, जंगल, जमीन और आने वाली पीढ़ियों के अधिकारों की रक्षा के लिए इस विषय पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।

