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गोड्डा में आरटीआई कार्यकर्ता की पहचान के पीछे चल रही थी मिनी गन फैक्ट्री, तीन गिरफ्तार

गोड्डा। महागामा थाना क्षेत्र के घाट बलिया गांव में सामने आई अवैध मिनी गन फैक्ट्री की जांच में पुलिस को कई चौंकाने वाले तथ्य मिले हैं। पुलिस के अनुसार, इस मामले में गिरफ्तार पवन कुमार तुरी बाहर से आरटीआई कार्यकर्ता और सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में सक्रिय था। उसके वाहन में प्रेस लिखा बोर्ड और विभिन्न सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी के रूप में पहचान दर्शाने वाले कई पहचान-पत्र और बोर्ड भी मिले हैं। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि सामाजिक गतिविधियों और आरटीआई से जुड़ी उसकी पहचान के पीछे हथियार निर्माण और आपूर्ति का नेटवर्क किस तरह संचालित हो रहा था।

महागामा थाना क्षेत्र के घाट बलिया गांव में 16 सितंबर को बिहार के मुंगेर एसटीएफ से मिले इनपुट के आधार पर महागामा पुलिस ने संयुक्त रूप से पवन कुमार तुरी के परिसर में छापेमारी की थी। कार्रवाई के दौरान पुलिस को हथियार बनाने में इस्तेमाल होने वाली मशीनरी, विभिन्न उपकरण, कच्चा माल, अर्धनिर्मित हथियार, देसी रायफल, जिंदा कारतूस और बड़ी मात्रा में इस्पात की पट्टियां मिली थीं। भारी मशीनरी को परिसर से निकालने के लिए जेसीबी की मदद लेनी पड़ी थी।

मामले की आगे की जांच के दौरान पुलिस ने 19 सितंबर को पवन कुमार तुरी, उम्र करीब 29 वर्ष, प्रीतम कुमार, उम्र करीब 28 वर्ष और इंद्रदेव रविदास, उम्र करीब 46 वर्ष को गिरफ्तार किया। पुलिस के मुताबिक पवन की निशानदेही पर अर्धनिर्मित हथियारों के परिवहन में इस्तेमाल की जा रही स्विफ्ट डिजायर कार संख्या जेएच17एसी3032 भी जब्त की गई है। पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर हथियार निर्माण, परिवहन और आपूर्ति से जुड़े अन्य लोगों की जानकारी जुटा रही है।

छापेमारी के दौरान पवन के परिसर और वाहन से प्रेस लिखा बोर्ड तथा कई पहचान-पत्र और बोर्ड बरामद होने की बात पुलिस ने कही है। इनमें उसे आरटीआई एक्टिविस्ट एंड सोशल वर्कर, महागामा ब्लॉक एंटी करप्शन से जुड़े सदस्य, जिला अध्यक्ष यूथ सेल गोड्डा, भारतीय सूचना अधिकार रक्षा मंच के जिला अध्यक्ष गोड्डा और जिला अध्यक्ष गोड्डा मानव अधिकार मिशन के रूप में दर्शाने वाली सामग्री शामिल है। पुलिस के अनुसार पवन ईसीएल से जुड़े विभिन्न मामलों में सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत आवेदन देकर जानकारी हासिल करता था और सामाजिक गतिविधियों में भी सक्रिय रहता था।

पुलिस की प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि अवैध मिनी गन फैक्ट्री करीब एक वर्ष से संचालित थी। पुलिस के मुताबिक यहां तैयार किए जा रहे हथियारों की आपूर्ति स्थानीय स्तर पर करने के बजाय बिहार में की जाती थी। इससे स्थानीय स्तर पर पुलिस की नजर से इस अवैध कारोबार को बचाए रखने की कोशिश की जाती थी। हालांकि, हथियारों की वास्तविक आपूर्ति किन लोगों तक होती थी, इसके लिए कौन-कौन लोग माध्यम बने हुए थे और पूरे नेटवर्क में कितने लोग शामिल हैं, इसकी जांच अभी जारी है।

पुलिस के अनुसार 16 सितंबर को मुंगेर से एसटीएफ की टीम हथियार बरामदगी से जुड़े एक मामले में सत्यापन और आवश्यक कार्रवाई के लिए महागामा पहुंची थी। इसके बाद महागामा पुलिस के साथ संयुक्त टीम ने घाट बलिया गांव में पवन कुमार तुरी के मकान पर छापेमारी की। कार्रवाई में हथियार निर्माण से संबंधित मशीनरी और उपकरणों के साथ अर्धनिर्मित पिस्टल, देसी रायफल, जिंदा कारतूस और बड़ी मात्रा में कच्चा माल बरामद किया गया। बरामदगी के बाद पुलिस ने पूरे परिसर की जांच करते हुए मशीनों और अन्य सामान को जब्त कर थाना पहुंचाया।

पुलिस इस मामले में हथियारों के निर्माण से लेकर उनके परिवहन और बिहार में कथित आपूर्ति तक की पूरी कड़ी खंगाल रही है। पहले गिरफ्तार किए गए दो आरोपियों को जेल भेजे जाने के बाद अब तीन और आरोपियों की गिरफ्तारी से जांच का दायरा बढ़ गया है। पुलिस का कहना है कि मामले में शामिल अन्य लोगों की गिरफ्तारी और हथियारों के पूरे नेटवर्क का पता लगाने के लिए संभावित ठिकानों पर छापेमारी जारी है।

पूरी कार्रवाई का नेतृत्व एसडीपीओ वरुण रजक ने किया। टीम में पुलिस निरीक्षक उपेंद्र कुमार महतो, महागामा थाना प्रभारी अभिनय आनंद, हनवारा थाना प्रभारी विकास कुमार, एसआई खालिद अहमद खां सहित पुलिस बल के जवान शामिल थे। पुलिस बरामद हथियार, मशीनरी, वाहन और अन्य दस्तावेजों को जांच का अहम हिस्सा मानकर आगे की कार्रवाई कर रही है।

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