चाईबासा: यूपीआई भुगतान से जुड़ी शुल्क व्यवस्था को लेकर कांग्रेस जिला प्रवक्ता त्रिशानु राय ने गुरुवार को केंद्र सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार को डिजिटल भुगतान व्यवस्था को लेकर अपनी नीति और नियामकीय मंशा स्पष्ट करनी चाहिए। यूपीआई आज आम जनता, छोटे दुकानदारों और कारोबारियों के दैनिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है।
त्रिशानु राय ने कहा कि सरकार की जिम्मेदारी केवल शुल्क व्यवस्था तय करना नहीं है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना है कि किसी नई व्यवस्था का आर्थिक बोझ आम जनता और छोटे कारोबारियों पर न पड़े। उन्होंने कहा कि यदि किसी नए शुल्क या एमडीआर का प्रावधान किया जाता है तो सरकार को इसके प्रभाव, पारदर्शिता और निगरानी की व्यवस्था भी स्पष्ट करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि डिजिटल इंडिया का उद्देश्य लोगों के लिए भुगतान व्यवस्था को आसान और सुविधाजनक बनाना था। इसे अतिरिक्त लागत का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए। सरकार को यह देखना चाहिए कि डिजिटल भुगतान से जुड़ी किसी भी अतिरिक्त लागत का अनुचित बोझ व्यापारियों के माध्यम से ग्राहकों पर न पड़े।
कांग्रेस जिला प्रवक्ता ने कहा कि छोटे दुकानदार और कारोबारी बड़ी संख्या में यूपीआई के माध्यम से भुगतान स्वीकार करते हैं। ऐसे में किसी भी प्रकार की अतिरिक्त लागत का असर उनके कारोबार पर पड़ सकता है। इसलिए किसी भी शुल्क व्यवस्था को लागू करने से पहले छोटे और मध्यम कारोबारियों के हितों को ध्यान में रखना जरूरी है।
त्रिशानु राय ने कहा कि यूपीआई की विश्वसनीयता जनता के भरोसे पर बनी है। सरकार को नीति, नियमन और निगरानी के स्तर पर स्पष्ट जवाबदेही तय करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए, जिसमें डिजिटल भुगतान की सुविधा बनी रहे और आम लोगों तथा छोटे कारोबारियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं पड़े।
उन्होंने केंद्र सरकार से यूपीआई से संबंधित शुल्क व्यवस्था को लेकर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। साथ ही कहा कि डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए ऐसी नीतियां बनाई जानी चाहिए, जिनसे आम जनता को सुविधा मिले और छोटे कारोबारियों के हित भी सुरक्षित रहें।

