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Wed. Sep 16th, 2026

*2000 रुपये से अधिक के यूपीआई भुगतान पर शुल्क के प्रस्ताव का चाईबासा चैंबर ने किया विरोध*

चाईबासा: 2000 रुपये से अधिक के पात्र यूपीआई व्यापारी भुगतान पर प्रस्तावित शुल्क व्यवस्था को लेकर चाईबासा चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज ने विरोध जताया है। चैंबर का कहना है कि यूपीआई आज छोटे दुकानदारों, सब्जी विक्रेताओं, ठेला-खोमचा कारोबारियों से लेकर बड़े व्यापारिक प्रतिष्ठानों तक रोजमर्रा के भुगतान का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है। ऐसे में यूपीआई भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क लगाने का प्रस्ताव व्यापारियों के लिए चिंता का विषय है।

चैंबर ने कहा कि पिछले कई वर्षों से व्यापारियों और आम लोगों को डिजिटल भुगतान अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया। दुकानों पर क्यूआर कोड लगाए गए और यूपीआई भुगतान को आसान, सुरक्षित और सुविधाजनक विकल्प के रूप में बढ़ावा दिया गया। अब बड़ी संख्या में ग्राहक नकद के बजाय यूपीआई के माध्यम से भुगतान कर रहे हैं। इसके कारण व्यापारियों ने भी अपनी भुगतान व्यवस्था को डिजिटल माध्यम के अनुसार तैयार किया है।

चैंबर के अनुसार चाईबासा समेत देशभर के छोटे दुकानदारों ने क्यूआर कोड लगाए, बैंक खातों को इससे जोड़ा और ग्राहकों को यूपीआई भुगतान की सुविधा उपलब्ध कराई। ऐसे में डिजिटल भुगतान पर अतिरिक्त लागत लगाने से व्यापारियों के लाभ पर असर पड़ सकता है।

चैंबर ने प्रस्तावित 0.4 प्रतिशत शुल्क को लेकर कहा कि पहली नजर में यह दर छोटी लग सकती है, लेकिन कम लाभ वाले कारोबार में प्रत्येक अतिरिक्त खर्च महत्वपूर्ण होता है। किराना, कपड़ा, स्टेशनरी, हार्डवेयर, मोटर वाहन के पुर्जे, इलेक्ट्रॉनिक्स, छोटे खुदरा प्रतिष्ठान और स्थानीय सेवा कारोबार पहले से ही किराया, बिजली, कर्मचारियों के वेतन, परिवहन, कर, बैंकिंग खर्च, पैकेजिंग और माल की लागत वहन कर रहे हैं। ऐसे में भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क से कारोबारियों पर आर्थिक दबाव बढ़ सकता है।

चैंबर ने कहा कि आज सब्जी विक्रेता से लेकर बड़े कारोबारी तक यूपीआई का इस्तेमाल कर रहे हैं। छोटे दुकानदारों के लिए क्यूआर कोड से भुगतान लेना ग्राहक सुविधा के साथ व्यापार की जरूरत भी बन चुका है।

चैंबर ने सरकार से किसी भी शुल्क व्यवस्था को लागू करने से पहले व्यापार मंडलों, वाणिज्य मंडलों, छोटे एवं मध्यम उद्योगों के प्रतिनिधियों तथा छोटे दुकानदारों से व्यापक विचार-विमर्श करने की मांग की है। चैंबर ने स्पष्ट किया कि उसका विरोध यूपीआई या डिजिटल भुगतान के खिलाफ नहीं है। चैंबर का कहना है कि डिजिटल भुगतान को बढ़ावा दिया जाए, लेकिन इसकी अतिरिक्त लागत का बोझ छोटे व्यापारियों पर नहीं डाला जाना चाहिए।

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