उज्जैन। मध्यप्रदेश में धार्मिक नगरी उज्जैन में प्राचीन खड़े हनुमान जी की प्रतिमा इन दिनों श्रद्धा के साथ-साथ कौतूहल का भी केंद्र बनी हुई है। सड़क चौड़ीकरण के लिए प्रतिमा को सुरक्षित स्थान पर ले जाने की पिछले करीब 10 दिनों से कोशिश की जा रही है, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद प्रतिमा अपनी जगह से नहीं हट सकी है। भारी मशीनों और तकनीकी संसाधनों के इस्तेमाल के बाद भी जब प्रतिमा को हटाना संभव नहीं हुआ तो अब इस पूरे मामले की वैज्ञानिक जांच कराने का निर्णय लिया गया है।
बताया जा रहा है कि सिंहस्थ 2028 की तैयारियों को लेकर उज्जैन में कई महत्वपूर्ण सड़कों के चौड़ीकरण और यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने का काम प्रस्तावित है। इसी क्रम में कंठाल चौराहे से छत्री चौक और बड़ा सराफा क्षेत्र की ओर सड़क चौड़ीकरण की योजना के दायरे में खड़े हनुमान मंदिर का हिस्सा भी प्रभावित हो रहा है। सड़क निर्माण में बाधा बन रहे मंदिर के ढांचे को हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई, लेकिन प्रतिमा को स्थानांतरित करने की कोशिश प्रशासन के लिए चुनौती बन गई।
प्रतिमा को नुकसान पहुंचाए बिना हटाने के लिए अलग-अलग स्तर पर तकनीकी प्रयास किए गए। मशीनों की सहायता से प्रतिमा को उठाने और उसके आधार को अलग करने की कोशिश की गई, लेकिन अपेक्षित सफलता नहीं मिली। लगातार प्रयासों के बावजूद प्रतिमा के नहीं हिलने के बाद अब विशेषज्ञों की राय लेने का फैसला किया गया है। आईआईटी इंदौर के विशेषज्ञ प्रतिमा के आधार, उसके नीचे की जमीन और जमीन के भीतर मौजूद संरचना का वैज्ञानिक अध्ययन करेंगे। जांच के जरिए यह पता लगाने का प्रयास होगा कि प्रतिमा किस प्रकार स्थापित है और उसे सुरक्षित तरीके से स्थानांतरित करने की तकनीकी संभावना क्या है।
प्रतिमा के अपनी जगह से नहीं हटने की खबर सामने आने के बाद श्रद्धालुओं में भी उत्सुकता बढ़ गई है। बड़ी संख्या में लोग मंदिर पहुंचकर हनुमान जी के दर्शन कर रहे हैं। भक्त इसे बजरंगबली की इच्छा और शक्ति से जोड़कर देख रहे हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि यदि लगातार प्रयासों के बावजूद प्रतिमा नहीं हिली है तो इसे सामान्य घटना मानकर नहीं देखा जाना चाहिए। वहीं कुछ लोगों ने प्रतिमा को किसी भी स्थिति में नहीं हटाने की मांग भी शुरू कर दी है।
मामले को लेकर धार्मिक भावनाएं भी तेज होती दिखाई दे रही हैं। मंदिर परिसर में भक्तों की आवाजाही बढ़ने के साथ भजन-कीर्तन और पूजा-अर्चना का दौर भी चल रहा है। श्रद्धालुओं का कहना है कि सड़क विकास जरूरी है, लेकिन इसके लिए प्राचीन धार्मिक स्थल और प्रतिमा की आस्था को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। दूसरी ओर प्रशासन का प्रयास है कि विकास कार्य और धार्मिक भावनाओं के बीच संतुलन बनाते हुए प्रतिमा को लेकर कोई निर्णय लिया जाए।
अब पूरे मामले में आईआईटी विशेषज्ञों की रिपोर्ट महत्वपूर्ण मानी जा रही है। वैज्ञानिक जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि प्रतिमा के नहीं हिलने के पीछे जमीन के भीतर की संरचना, आधार की बनावट या कोई अन्य तकनीकी कारण है। रिपोर्ट सामने आने के बाद ही यह तय होगा कि प्रतिमा को सुरक्षित तरीके से स्थानांतरित किया जा सकता है या सड़क चौड़ीकरण की योजना में बदलाव करना पड़ेगा। फिलहाल खड़े हनुमान जी की अडिग प्रतिमा उज्जैन में आस्था, परंपरा और आधुनिक विकास के बीच एक बड़ा सवाल बनकर सामने आई है।

