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Tue. Sep 1st, 2026

जमशेदपुर। आपदा के दौरान लोगों की जान बचाना सबसे पहली प्राथमिकता है, लेकिन राहत और बचाव अभियान के बाद क्षतिग्रस्त संपत्तियों, रेलवे उपकरणों और जरूरी संसाधनों को सुरक्षित रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। आपदा के बाद नुकसान को नियंत्रित करने और उपलब्ध संसाधनों को संरक्षित करने में साल्वेज सेवा की अहम भूमिका होती है। यह बातें राष्ट्रपति सम्मान से सम्मानित रेल सिविल डिफेंस इंस्पेक्टर संतोष कुमार ने मंगलवार को जोनल प्रशिक्षण संस्थान (ZRTI), सिनी में आयोजित विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान कहीं।

ईस्ट कोस्ट रेलवे, दक्षिण पूर्व रेलवे और दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के विभिन्न मंडलों से पहुंचे 415 रेलकर्मियों को आपदा प्रबंधन और साल्वेज सेवा से संबंधित प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षणार्थियों की संख्या अधिक होने के कारण कार्यक्रम का आयोजन तीन सत्रों में किया गया। प्रशिक्षण में बिलासपुर, विशाखापत्तनम, नागपुर, चक्रधरपुर, रायगढ़, रांची, आद्रा, खुर्दा, रायपुर और खड़गपुर समेत दस मंडलों के रेलकर्मी शामिल हुए।

कार्यक्रम की शुरुआत प्रार्थना सभा से हुई। इस दौरान प्रशिक्षण संस्थान के प्राचार्य, उप प्राचार्य, मुख्य अनुदेशक समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे। अतिथि प्रशिक्षक के रूप में संतोष कुमार ने रेलकर्मियों को आपदा के दौरान तत्काल कार्रवाई से लेकर राहत एवं बचाव के बाद की जाने वाली प्रक्रियाओं तक की जानकारी दी।

उन्होंने कहा कि भूकंप, बाढ़, चक्रवात और अग्निकांड जैसी प्राकृतिक आपदाओं के अलावा मानव निर्मित दुर्घटनाओं में भी जान-माल के साथ रेलवे के आधारभूत ढांचे और महत्वपूर्ण संसाधनों को नुकसान पहुंचता है। ऐसे में बचाव अभियान पूरा होने के बाद प्रभावित क्षेत्र को सुरक्षित करना, क्षतिग्रस्त सामग्री का आकलन करना और उपयोगी संसाधनों को सुरक्षित रखना जरूरी है।

संतोष कुमार ने बताया कि आपदा प्रबंधन में समय पर लिया गया निर्णय, बेहतर योजना और टीम के बीच समन्वय नुकसान को कम करने में निर्णायक भूमिका निभाता है। साल्वेज प्रक्रिया के जरिए रेलवे की महत्वपूर्ण संपत्तियों और उपकरणों को बचाने के साथ आपदा के बाद उत्पन्न होने वाले संक्रमण, महामारी और अन्य संभावित खतरों को भी कम किया जा सकता है।

प्रशिक्षण के दौरान रेलकर्मियों को गोल्डन ऑवर में कार्रवाई, प्राथमिक सुरक्षा, बाढ़ और भूकंप के दौरान बचाव, एम्बुलेंस संचालन, ट्रायेज, प्राथमिक चिकित्सा, फर्स्ट एड, सीपीआर, सर्पदंश और डॉग बाइट के मामलों में प्राथमिक उपचार, अग्निशमन तथा विभिन्न रेस्क्यू तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।

इसके अलावा आपदा जैसी परिस्थितियों में घटनास्थल का आकलन करने, उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करने, तेजी से निर्णय लेने और विभिन्न टीमों के साथ समन्वय स्थापित करने पर भी विशेष जोर दिया गया। प्रशिक्षण को प्रभावी बनाने के लिए पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन और डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल किया गया।

कार्यक्रम में स्टेशन मैनेजर, ट्रेन मैनेजर, प्रोबेशनरी स्टेशन मैनेजर, प्रोबेशनरी पैसेंजर ट्रेन मैनेजर, लोको पायलट समेत विभिन्न श्रेणी के रेलकर्मियों ने हिस्सा लिया। प्रशिक्षणार्थियों ने संतोष कुमार के व्याख्यान की सराहना करते हुए कहा कि सरल भाषा और व्यावहारिक उदाहरणों के जरिए दी गई जानकारी से आपदा के समय सही निर्णय लेने और प्रभावी ढंग से बचाव कार्य करने का आत्मविश्वास बढ़ा है।

समापन के अवसर पर संस्थान के मुख्य अनुदेशक ने प्रशिक्षण में शामिल अधिकारियों, प्रशिक्षकों और सभी रेलकर्मियों के प्रति आभार जताया। उन्होंने आपदा प्रबंधन की तैयारियों को मजबूत करने के लिए भविष्य में भी ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम लगातार आयोजित करने की आवश्यकता बताई।

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