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केरला समाजम मॉडल स्कूल में फिजिक्स और UAV तकनीक पर कार्यशाला, छात्रों ने समझे ड्रोन तकनीक के गुर

जमशेदपुर: केरला समाजम मॉडल स्कूल (KSMS) में विद्यार्थियों को आधुनिक विज्ञान और उभरती तकनीकों से परिचित कराने के उद्देश्य से फिजिक्स और अनमैन्ड एरियल व्हीकल (UAV) तकनीक पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। स्कूल के सभागार में आयोजित इस कार्यशाला का विषय ‘Physics and UAV – Innovate, Automate, Fly’ रहा।

कार्यशाला का आयोजन स्कूल की अटल टिंकरिंग लैब (ATL) और फिजिक्स विभाग के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। कार्यक्रम में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग साइंस एंड टेक्नोलॉजी (IIEST), शिबपुर, कोलकाता से आए प्रोफेसरों और शोधकर्ताओं की टीम ने विद्यार्थियों के साथ अपने अनुभव और तकनीकी जानकारी साझा की।

कार्यक्रम की शुरुआत स्वागत संबोधन और प्रसिद्ध वैज्ञानिक कार्ल सागन के विचारों के साथ हुई। स्कूल की प्राचार्य रीना बनर्जी ने स्वागत संबोधन में विद्यार्थियों को सैद्धांतिक ज्ञान को वास्तविक जीवन के प्रयोगों से जोड़ने के लिए ऐसे आयोजनों के महत्व पर प्रकाश डाला।

कार्यशाला के पहले सत्र में फिजिक्स के विभिन्न मूलभूत सिद्धांतों को व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से समझाया गया। पदार्थ, ऊर्जा, प्रकाश और बल जैसे विषयों को आधुनिक तकनीक और इंजीनियरिंग से जोड़ते हुए विद्यार्थियों को बताया गया कि फिजिक्स केवल पाठ्यक्रम का विषय नहीं, बल्कि नई तकनीकों को समझने और विकसित करने का महत्वपूर्ण आधार है।

कार्यशाला के दूसरे सत्र में विद्यार्थियों को UAV और ड्रोन तकनीक की दुनिया से परिचित कराया गया। विशेषज्ञों ने ड्रोन के उड़ने, संतुलन बनाए रखने और उसके नियंत्रण से जुड़े मूल सिद्धांतों की जानकारी दी। इसके साथ ही कृषि, सर्वेक्षण, आपदा प्रबंधन और वैज्ञानिक अनुसंधान समेत विभिन्न क्षेत्रों में UAV के बढ़ते उपयोग के बारे में भी बताया गया।

कार्यशाला का प्रमुख आकर्षण लाइव ड्रोन फ्लाइंग डेमोंस्ट्रेशन रहा। विद्यार्थियों ने ड्रोन को उड़ते हुए देखा और इस दौरान उन्हें एरियल टेक्नोलॉजी के व्यावहारिक पहलुओं को समझने का अवसर मिला।

कार्यक्रम में कक्षा 7 से 12 तक के विद्यार्थियों के साथ शिक्षकों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया। संवादात्मक सत्रों के दौरान विद्यार्थियों ने सवाल पूछे और विज्ञान एवं तकनीक से जुड़े विषयों को व्यावहारिक रूप से समझने में रुचि दिखाई। कार्यशाला ने विद्यार्थियों में जिज्ञासा, रचनात्मक सोच, नवाचार और समस्या समाधान की क्षमता विकसित करने पर जोर दिया।

समापन सत्र में विद्यार्थियों को केवल सवालों के जवाब तलाशने के बजाय सार्थक सवाल पूछने, नई संभावनाओं को तलाशने और विचारों को व्यावहारिक नवाचार में बदलने के लिए प्रेरित किया गया।

स्कूल प्रबंधन ने IIEST, शिबपुर से आए विशेषज्ञों के प्रति आभार जताया। साथ ही कार्यक्रम को सफल बनाने में प्राचार्य, शिक्षकों, स्वयंसेवकों और विद्यार्थियों के योगदान की सराहना की।

यह कार्यशाला स्कूल में विद्यार्थियों को कक्षा की पढ़ाई से आगे बढ़कर विज्ञान और तकनीक की बदलती दुनिया को समझने तथा सीखने, खोजने, नवाचार करने और निर्माण करने के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल रही।

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