जमशेदपुर। देश की साझा संस्कृति, सामाजिक एकता और आपसी भाईचारे को मजबूत करने के उद्देश्य से सर्वोदय समिति, जमशेदपुर की ओर से 13 सितंबर को ‘साझी शहादत, साझी विरासत’ विषय पर सेमिनार आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम बिष्टुपुर स्थित माइकल जॉन ऑडिटोरियम में अपराह्न 3:30 बजे शुरू होगा।
सेमिनार की तैयारियों को लेकर बुधवार को आयोजित प्रेस वार्ता में सर्वोदय समिति के अध्यक्ष रियाजुद्दीन खान ने कार्यक्रम की रूपरेखा और उद्देश्य की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आयोजन में देश और झारखंड के कई वरिष्ठ राजनीतिक एवं सामाजिक कार्यकर्ता, श्रमिक नेता, जनप्रतिनिधि और प्रबुद्ध नागरिक शामिल होंगे।
रियाजुद्दीन खान ने कहा कि भारत की पहचान हमेशा से विविधताओं के बीच एकता, सांस्कृतिक समन्वय और आपसी सौहार्द की रही है। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान अलग-अलग धर्मों, समुदायों और वर्गों के लोगों ने एकजुट होकर देश की आजादी के लिए संघर्ष किया। अनेक स्वतंत्रता सेनानियों ने राष्ट्र की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राणों की आहुति दी।
उन्होंने कहा कि आजादी के बाद देश के विकास और राष्ट्र निर्माण में भी समाज के प्रत्येक वर्ग ने अपनी भूमिका निभाई। भारत की यही साझा शहादत और साझी विरासत उसकी सबसे बड़ी ताकत है। इसे समझना और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना समाज की जिम्मेदारी है।
प्रेस वार्ता में वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान समय में सामाजिक विभाजन और आपसी दूरी बढ़ाने वाली प्रवृत्तियों के बीच देश के साझा इतिहास को सामने रखना बेहद जरूरी हो गया है। स्वतंत्रता संग्राम में विभिन्न समुदायों के योगदान और भारत की समावेशी सांस्कृतिक परंपरा को लोगों के बीच पहुंचाने की आवश्यकता है।
सर्वोदय समिति के अनुसार सेमिनार के माध्यम से सामाजिक समरसता, भाईचारे और एकता के विचार को मजबूती देने का प्रयास किया जाएगा। आयोजन में वक्ता भारत की साझी विरासत और स्वतंत्रता संघर्ष के साझा इतिहास से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार रखेंगे।

