जमशेदपुर। स्वर्णरेखा नदी किनारे बसी गरीब बस्तियों में घरों को तोड़े जाने की संभावित कार्रवाई को लेकर पूर्व मंत्री और भुईयां समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष दुलाल भुईयां ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र भेजकर एनजीटी के मामले का हवाला देकर वर्षों से बसे गरीब, दलित, मजदूर और श्रमिक परिवारों के घरों को बिना पुनर्वास तोड़ने की कार्रवाई पर रोक लगाने का आग्रह किया है।
दुलाल भुईयां ने कहा कि छायानगर, निर्मल नगर, इंदिरा नगर, भुईयां नगर, कल्याण नगर, चंडी नगर, आदर्श नगर, किशोरी नगर, कानू भट्ठा समेत जमशेदपुर की कई बस्तियों में लोग दशकों से रह रहे हैं। इनमें बड़ी संख्या ऐसे परिवारों की है, जिन्होंने अपनी मेहनत की कमाई से छोटे-छोटे मकान बनाए हैं। ऐसे परिवारों को अचानक बेघर करना मानवीय और सामाजिक न्याय के विरुद्ध होगा।
उनका कहना है कि यदि किसी कारण से सरकारी भूमि खाली कराना आवश्यक है तो पहले प्रभावित परिवारों का विस्तृत सर्वे कराया जाए। पात्र परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना अथवा अन्य सरकारी आवासीय योजनाओं के तहत वैकल्पिक आवास उपलब्ध कराने के बाद ही विस्थापन की कार्रवाई की जानी चाहिए।
इधर, शनिवार को मानगो अंचल प्रशासन की टीम स्वर्णरेखा नदी किनारे बैकुंठनगर पहुंची। बताया गया कि करीब 13 घरों को हटाने के लिए टीम पहुंची थी। अधिकारियों ने परिवारों को सामान हटाने के लिए समय दिया, जिसके बाद लोग अपने घरेलू सामान को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने लगे। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि एक ही क्षेत्र में कई मकान होने के बावजूद चुनिंदा घरों को ही नोटिस दिया गया है।
कुंवर बस्ती और ग्वाला बस्ती में भी कार्रवाई की आशंका से लोगों में चिंता बनी रही। दुलाल भुईयां ने मुख्यमंत्री से जिला प्रशासन को स्पष्ट निर्देश देने की मांग की है कि बिना उचित सुनवाई और पुनर्वास के किसी गरीब परिवार का घर नहीं तोड़ा जाए।

