Breaking
Thu. Aug 13th, 2026

*डिमना लेक में रेल सिविल डिफेंस टीम ने सीखा जल आपदा में रेस्क्यू का हुनर*

जमशेदपुर। जल दुर्घटनाओं, बाढ़ और डूबने की घटनाओं के दौरान प्रभावी राहत एवं बचाव अभियान चलाने के लिए रेल सिविल डिफेंस टीम को व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। गुरुवार को डिमना लेक में आयोजित वाटरमैनशिप प्रशिक्षण के दौरान सिविल डिफेंस के जवानों एवं स्वयंसेवकों ने जल बचाव की विभिन्न तकनीकों का अभ्यास किया।

प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को जल में सुरक्षित तरीके से उतरने, तैराकी, लाइफ जैकेट के इस्तेमाल, रस्सी के जरिए रेस्क्यू, नाव संचालन और डूब रहे व्यक्ति को सुरक्षित बाहर निकालने की तकनीक सिखाई गई। इसके साथ ही प्राथमिक उपचार और सीपीआर का प्रशिक्षण भी दिया गया। आपात स्थिति में टीम के सदस्यों के बीच बेहतर तालमेल और तत्काल निर्णय लेने की क्षमता विकसित करने के लिए विभिन्न परिस्थितियों पर आधारित मॉक ड्रिल कराए गए।

सिविल डिफेंस इंस्पेक्टर एवं राष्ट्रपति सम्मानित सदस्य संतोष कुमार ने कहा कि पूर्वी और पश्चिमी सिंहभूम क्षेत्र में नदियों, जलाशयों और अन्य जल स्रोतों में डूबने की घटनाएं सामने आती रहती हैं। स्वर्णरेखा और खरकई नदी समेत विभिन्न जल क्षेत्रों में कई बार राहत एवं बचाव अभियान चलाने की आवश्यकता पड़ती है। ऐसी परिस्थितियों में प्रशिक्षित रेस्क्यूअर की मौजूदगी बेहद जरूरी है।

उन्होंने कहा कि जल बचाव अभियान में सबसे पहले रेस्क्यूअर की सुरक्षा सुनिश्चित करना आवश्यक है। प्रशिक्षण के माध्यम से रेस्क्यू टीम को वैज्ञानिक और सुरक्षित तरीके से अभियान चलाने के लिए तैयार किया जा रहा है। कुशल रेस्क्यूअर की संख्या बढ़ने से जल दुर्घटनाओं के दौरान जान बचाने की संभावना भी बढ़ेगी।

संतोष कुमार ने बताया कि कई जल दुर्घटनाओं में स्थानीय मछुआरे भी बचाव कार्य में सहयोग करते हैं, लेकिन आपदा की स्थिति में व्यवस्थित और सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू करने के लिए विशेष प्रशिक्षण जरूरी है। इसी उद्देश्य से रेल सिविल डिफेंस के जवानों और स्वयंसेवकों को नियमित रूप से व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि जरूरत पड़ने पर वे रेलवे के साथ-साथ स्थानीय प्रशासन के राहत एवं बचाव अभियानों में भी सहयोग कर सकें।

वाटरमैनशिप प्रशिक्षक मजरूल बारीक और उनकी टीम ने प्रशिक्षण के दौरान जल बचाव की विभिन्न तकनीकों का प्रदर्शन किया। प्रशिक्षण में स्थानीय स्तर पर उपलब्ध सामान का इस्तेमाल कर वैकल्पिक बचाव उपकरण तैयार करने की जानकारी भी दी गई। खाली ड्रम, प्लास्टिक की बोतल और गैलन की मदद से अस्थायी फ्लोटिंग उपकरण तैयार कर उनका इस्तेमाल करते हुए रेस्क्यू का अभ्यास कराया गया।

प्रशिक्षणार्थियों को मैन-मेड स्ट्रेचर तैयार करने और घायल या अचेत व्यक्ति को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने की तकनीक भी सिखाई गई। इस दौरान टीमवर्क, आपसी समन्वय, सुरक्षा मानकों और आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई को विशेष महत्व दिया गया।

संतोष कुमार ने कहा कि वाटरमैनशिप प्रशिक्षण का उद्देश्य केवल तैराकी का कौशल विकसित करना नहीं है, बल्कि जवानों को अनुशासित, सुरक्षित और वैज्ञानिक तरीके से जल बचाव अभियान संचालित करने में सक्षम बनाना है। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षित सिविल डिफेंस टीम बाढ़, जल दुर्घटना और अन्य जल आपदाओं के समय महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

प्रशिक्षण के समापन पर सिविल डिफेंस डेमोंस्ट्रेटर कल्याण कुमार साहू ने प्रशिक्षक मजरूल बारीक एवं उनकी टीम का आभार जताया और प्रशिक्षण को उपयोगी बताते हुए धन्यवाद ज्ञापन किया। कार्यक्रम में संतोष कुमार, अनिल कुमार सिंह, कल्याण कुमार साहू, शंकर कुमार प्रसाद, रितेश गुहा, संजय कुमार, गीता कुमारी कंचन, बीरेन्द्र, शंकर, पुराण, सागर, प्रशांत, अनूप, स्वर्णजीत, अमित कुमार, बलिराम, गुलशन कुमार समेत रेल सिविल डिफेंस टीम के करीब 25 सदस्य एवं स्वयंसेवक मौजूद रहे।

Related Post