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राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित हुई केरला पब्लिक स्कूल्स की पर्यावरण पहल, विजयाम कार्था और लक्ष्मी को मिला नेक्सस ऑफ गुड अवार्ड 2026

जमशेदपुर: पर्यावरण संरक्षण को स्कूली शिक्षा से जोड़कर विद्यार्थियों को सामाजिक बदलाव का सक्रिय भागीदार बनाने की दिशा में केरला पब्लिक स्कूल्स की पहल को राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि मिली है। स्कूल की संस्थापक उपाध्यक्ष विजयाम कार्था और अकादमिक निदेशक लक्ष्मी को 5वें वार्षिक ‘नेक्सस ऑफ गुड अवार्ड्स 2026’ से सम्मानित किया गया है। उन्हें यह सम्मान देशव्यापी पर्यावरण अभियान ‘क्लासरूम्स टू क्लाइमेट एक्शन क्रूसेडर्स’ (CCAC) की शुरुआत और उसके विस्तार में महत्वपूर्ण योगदान के लिए दिया गया।

1 नवंबर 2026 को आयोजित पुरस्कार समारोह में मिली यह उपलब्धि केरला पब्लिक स्कूल्स के लिए गौरव का विषय है। विजयाम कार्था की परिकल्पना से शुरू हुआ यह अभियान अब एक व्यापक राष्ट्रीय पहल का रूप ले चुका है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति केवल जागरूक करना नहीं, बल्कि उन्हें अपने आसपास की समस्याओं का समाधान तलाशने और ठोस कदम उठाने के लिए तैयार करना है।

65 स्कूलों से शुरू हुआ अभियान, 17 राज्यों तक पहुंचा

CCAC की शुरुआत शैक्षणिक सत्र 2025-26 में हुई थी। पहले संस्करण में देश के 65 से अधिक स्कूलों ने भागीदारी की थी। अब शैक्षणिक सत्र 2026-27 में इस अभियान से 17 राज्यों के करीब 140 स्कूल जुड़ चुके हैं। कम समय में अभियान का यह विस्तार स्कूली स्तर पर पर्यावरण संरक्षण को लेकर बढ़ती जागरूकता और सामूहिक प्रयासों को दर्शाता है।

इस पहल के तहत स्कूलों को अपने आसपास मौजूद पर्यावरणीय समस्याओं की पहचान करने और उनके व्यावहारिक समाधान पर काम करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। इसके लिए विद्यार्थी, शिक्षक और स्कूल प्रबंधन स्थानीय गैर-सरकारी संगठनों, समुदायों, उद्योगों, अभिभावकों और सरकारी एजेंसियों के साथ मिलकर काम करते हैं।

पांच प्रमुख क्षेत्रों पर विशेष फोकस

अभियान के तहत पर्यावरण संरक्षण से जुड़े पांच प्रमुख क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई है। इनमें जल संरक्षण, हरित क्षेत्र का विस्तार, अपशिष्ट प्रबंधन, सामुदायिक सशक्तिकरण और पर्यावरणीय स्थिरता के साथ जलवायु कार्रवाई शामिल हैं।

इस पहल की खासियत यह है कि इसमें केवल जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने तक सीमित नहीं रहा जाता। प्रत्येक परियोजना को जियो-टैग किया जाता है और उसके कार्यों का दस्तावेजीकरण करने के साथ प्रभाव का मूल्यांकन भी किया जाता है। इससे अभियान के तहत किए जा रहे कार्यों की पारदर्शिता, जवाबदेही और उनके वास्तविक परिणामों को सुनिश्चित करने में मदद मिलती है।

किताबों से निकलकर वास्तविक जीवन से जुड़ रही शिक्षा

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 की भावना के अनुरूप CCAC विद्यार्थियों को अनुभव आधारित शिक्षा से जोड़ता है। इसके माध्यम से बच्चे कक्षा में पढ़ी गई बातों को वास्तविक परिस्थितियों में लागू करना सीख रहे हैं। पर्यावरण से जुड़ी समस्याओं को समझने के साथ उनके समाधान में सक्रिय भागीदारी भी सुनिश्चित की जा रही है।

 

इस अभियान का एक महत्वपूर्ण पहलू विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास से भी जुड़ा है। इसके जरिए उनमें नेतृत्व क्षमता, टीम वर्क, सहानुभूति, नवाचार, जवाबदेही और जिम्मेदार नागरिकता जैसे गुण विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है। स्कूलों का उद्देश्य बच्चों को पर्यावरण के प्रति संवेदनशील बनाने के साथ उन्हें अपने परिवार और समुदाय में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए प्रेरित करना है।

संस्थापक अध्यक्ष एपीआर नायर की स्मृति में दिए जाते हैं पुरस्कार

नेक्सस ऑफ गुड की ओर से दिया गया यह सम्मान केरला पब्लिक स्कूल्स के लिए इसलिए भी खास है, क्योंकि इन पुरस्कारों की शुरुआत संस्थान के संस्थापक अध्यक्ष स्वर्गीय एपीआर नायर की स्मृति में की गई थी। शिक्षा के प्रति उनकी दूरदर्शी सोच और समर्पण आज भी संस्थान के लिए प्रेरणास्रोत है।

इस उपलब्धि पर केरला पब्लिक स्कूल्स ने अभियान से जुड़े सभी स्कूलों, प्राचार्यों, शिक्षकों, विद्यार्थियों, अभिभावकों, मार्गदर्शकों और सामुदायिक सहयोगियों के प्रति आभार जताया है। साथ ही, पहल को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान देने के लिए नेक्सस ऑफ गुड का धन्यवाद किया है।

केरला पब्लिक स्कूल्स का मानना है कि पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी केवल आने वाली पीढ़ियों पर नहीं छोड़ी जा सकती। इसके लिए आज के बच्चों को जागरूक, संवेदनशील और जिम्मेदार बनाना जरूरी है। इसी सोच के साथ शुरू हुआ CCAC अब 17 राज्यों के करीब 140 स्कूलों को एक साझा मंच पर जोड़ चुका है।

65 से अधिक स्कूलों से शुरू हुआ यह सफर अब देशव्यापी अभियान बन रहा है। केरला पब्लिक स्कूल्स की इस पहल का लक्ष्य विद्यार्थियों की ऐसी पीढ़ी तैयार करना है, जो पर्यावरणीय चुनौतियों को समझने के साथ उनके समाधान में भी सक्रिय भूमिका निभाए। अभियान का संदेश है कि जागरूकता से समझ विकसित होती है और वास्तविक बदलाव के लिए उसे सामूहिक प्रयासों के जरिए जमीन पर उतारना जरूरी है।

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