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डुमरिया में मलेरिया का कहर, दो बच्चों की मौत के बाद जागा स्वास्थ्य विभाग, नियमित जांच नहीं होने से ग्रामीणों में नाराजगी डुमरिया में मलेरिया का कहर, दो बच्चों की मौत के बाद जागा स्वास्थ्य विभाग, नियमित जांच नहीं होने से ग्रामीणों में नाराजगी

जमशेदपुर। पूर्वी सिंहभूम जिले के डुमरिया प्रखंड में मलेरिया का प्रकोप गंभीर चिंता का विषय बन गया है। महज तीन दिनों के भीतर दो बच्चों की मौत से क्षेत्र में दहशत का माहौल है। 21 अक्टूबर को बाकड़ाकोचा गांव के 13 वर्षीय शेखर टुडू और 23 अक्टूबर को झांयाडीह गांव के 11 वर्षीय प्रदीप मुर्मू की मलेरिया से मौत हो गई। लगातार दो बच्चों की जान जाने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित गांवों में जांच अभियान शुरू किया है। हालांकि, ग्रामीणों का आरोप है कि विभाग की सक्रियता बीमारी से मौत होने के बाद ही दिखाई देती है, जबकि पहले से मलेरिया प्रभावित घोषित गांवों में नियमित जांच और चिकित्सा शिविरों की व्यवस्था नहीं है।

डुमरिया प्रखंड के भीतरआमदा, बाकड़ाकोचा, माड़ोतोलिया, केंदुआ, पलाशबनी, डिबूडीह, लखाईडीह, रुपुकोचा, बहादा, चटानीपानी, चीटामाटी, सराजगाडिया, भीतरचाकड़ी, उपरबांकीशोल, पाटरामारा और कीताकोचा समेत कई गांव मलेरिया प्रभावित क्षेत्र के रूप में चिह्नित हैं। इसके बावजूद ग्रामीणों का कहना है कि इन गांवों में नियमित रूप से जांच नहीं होने के कारण बीमारी का समय पर पता नहीं चल पाता। कई बार जांच अभियान केवल औपचारिकता बनकर रह जाता है, जिससे मरीजों को समय पर उपचार मिलने में परेशानी होती है।

ग्रामीणों के अनुसार, मलेरिया की रोकथाम की जिम्मेदारी मुख्य रूप से स्वास्थ्य सहिया पर निर्भर है। कुछ मल्टी पर्पज वर्कर (एमपीडब्ल्यू) नियमित रूप से गांवों में नहीं पहुंचते, जबकि कुछ कर्मचारी अपने स्तर से सक्रिय रहते हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि किसी मरीज की मौत होने के बाद स्वास्थ्य विभाग जांच शिविर लगाता है, लेकिन कुछ दिनों बाद निगरानी और जांच की रफ्तार फिर धीमी पड़ जाती है। इससे बीमारी पर स्थायी नियंत्रण की कोशिश प्रभावित हो रही है।

दो बच्चों की मौत के बाद रविवार को गोजातोल, बाकड़ा, लांगों, बुरूड़ीह, रायसेनबेड़ा और माड़ोतोलिया गांवों में मलेरिया जांच शिविर लगाए गए। डुमरिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की ओपीडी में भी मलेरिया के मरीज लगातार पहुंच रहे हैं। शनिवार को छह लोग मलेरिया पॉजिटिव पाए गए थे। ग्रामीणों का कहना है कि प्रखंड में हर साल मलेरिया से मौत के मामले सामने आते हैं, लेकिन कुछ घटनाएं गांवों तक ही सीमित रह जाती हैं और उनका आधिकारिक आंकड़ा भी सामने नहीं आ पाता।

डुमरिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सा प्रभारी डॉ. पराव मांझी ने बताया कि मलेरिया पर नियंत्रण के लिए स्वास्थ्य विभाग हरसंभव प्रयास कर रहा है। प्रखंड के बीहड़ और दुर्गम गांवों में मलेरिया का प्रकोप अधिक है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें नियमित अंतराल पर गांवों में जाकर जांच करती हैं। मरीजों को उपचार उपलब्ध कराने के साथ ही लोगों को मलेरिया से बचाव के प्रति जागरूक भी किया जा रहा है।

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