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जमशेदपुर के रणबीर सिंह का झारखंड अंडर-16 क्रिकेट टीम में चयन, विजय मर्चेंट ट्रॉफी में करेंगे राज्य का प्रतिनिधित्व

जमशेदपुर: केरला समाजम मॉडल स्कूल (केएसएमएस), जमशेदपुर के कक्षा नौवीं के छात्र रणबीर सिंह का झारखंड अंडर-16 क्रिकेट टीम में चयन हुआ है। वह भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के तत्वावधान में आयोजित होने वाली प्रतिष्ठित विजय मर्चेंट ट्रॉफी में झारखंड का प्रतिनिधित्व करेंगे। रणबीर की इस उपलब्धि से स्कूल में खुशी का माहौल है।

रणबीर का चयन उनके क्रिकेट करियर की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वह जमशेदपुर के सीबीएसई और आईसीएसई स्कूलों से चयनित होने वाले एकमात्र खिलाड़ी हैं। उनकी इस सफलता को शहर के स्कूली क्रिकेट जगत के लिए भी खास माना जा रहा है।

विजय मर्चेंट ट्रॉफी देश की प्रमुख अंडर-16 क्रिकेट प्रतियोगिताओं में शामिल है। इस टूर्नामेंट में विभिन्न राज्यों की टीमें हिस्सा लेती हैं, जहां युवा खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा दिखाने और राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने का अवसर मिलता है। रणबीर का चयन उनकी मेहनत, निरंतर अभ्यास और क्रिकेट के प्रति समर्पण को दर्शाता है।

स्कूल के खेल विभाग की भूमिका अहम

रणबीर की इस सफलता में केरला समाजम मॉडल स्कूल के खेल विभाग की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही है। स्कूल का खेल विभाग विद्यार्थियों को खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करता रहा है। विभाग में दीपक जगन, शहबाज खान, निहाल सिंह, अंजनी कुमारी और निशा कुमारी शामिल हैं, जो विद्यार्थियों को मार्गदर्शन देने और उनकी खेल प्रतिभा को निखारने में योगदान दे रहे हैं।

रणबीर के चयन पर स्कूल की एकेडमिक डायरेक्टर नंदिनी शुक्ला, प्रिंसिपल रीना बनर्जी, वाइस प्रिंसिपल ए. एल. अब्राहम, हेडमिस्ट्रेस सुजाता सिंह और रजिस्ट्रार वृंदा सुरेश ने उन्हें बधाई दी। स्कूल प्रबंधन ने रणबीर के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए उम्मीद जताई कि वह प्रतियोगिता में बेहतर प्रदर्शन करेंगे और खेल भावना का परिचय देते हुए स्कूल तथा झारखंड का नाम रोशन करेंगे।

स्कूल प्रबंधन ने इस उपलब्धि का श्रेय विद्यार्थियों को मिलने वाले निरंतर प्रोत्साहन और सहयोग को दिया। इसमें शिक्षकों, प्रशिक्षकों, स्कूल प्रबंधन और सहयोगी कर्मचारियों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया।

रणबीर सिंह का चयन शहर के अन्य युवा क्रिकेटरों के लिए प्रेरणादायक है। उनकी इस उपलब्धि ने एक बार फिर साबित किया है कि लगन, अनुशासन और निरंतर प्रयास के दम पर कम उम्र में भी खेल के क्षेत्र में बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है।

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