जमशेदपुर. सिख आंदोलन समिति और झारखंड सिख कोऑर्डिनेशन कमेटी, जमशेदपुर ने झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केंद्रीय कोयला मंत्री दिशोम गुरु शिबू सोरेन की पत्नी और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन व बसंत सोरेन की माता दिवंगत रूपी सोरेन को श्रद्धांजलि अर्पित की. दोनों संगठनों ने उनके निधन पर गहरा दुख जताते हुए शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की.
रूपी सोरेन का निधन 7 अक्टूबर 2026 को 71 वर्ष की आयु में हुआ था. समिति की ओर से जारी बयान में कहा गया कि उन्होंने जीवन के हर उतार-चढ़ाव में अपने परिवार का साथ दिया और सुख-दुख के साथ विभिन्न आंदोलनों में भी परिवार के साथ खड़ी रहीं.
18 अक्टूबर को रामगढ़ जिले के नेमरा गांव में रूपी सोरेन के श्राद्ध भोज और श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इसमें विभिन्न सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ टाटा समूह के वरिष्ठ पदाधिकारी भी शामिल हुए. झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने दिवंगत रूपी सोरेन को श्रद्धांजलि दी और सोरेन परिवार के साथ अपने करीब 45 वर्षों पुराने संबंधों को याद किया.
कार्यक्रम में झारखंड अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष हिदायतुल्ला खान, उपाध्यक्ष ज्योति सिंह मथारू, भाजपा के पूर्व प्रदेश प्रवक्ता अमरप्रीत सिंह काले और स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी समेत कई मंत्री, विधायक और अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे. झारखंड के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे लोगों ने भी दिवंगत रूपी सोरेन को श्रद्धांजलि अर्पित की.
कार्यक्रम में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे. समिति के अनुसार, जमशेदपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर भी पुलिस अधिकारियों की एक टीम सुरक्षा व्यवस्था संभालने के लिए नेमरा भेजी गई थी. श्रद्धांजलि कार्यक्रम से एक दिन पहले झारखंड सिख कोऑर्डिनेशन कमेटी के पदाधिकारियों ने भी नेमरा पहुंचकर दिवंगत रूपी सोरेन को श्रद्धांजलि दी थी.
श्राद्ध भोज में उपस्थिति को लेकर समिति ने रखी बात
समिति की ओर से जारी बयान में दावा किया गया कि श्राद्ध भोज के लिए करीब सात लाख लोगों के भोजन की व्यवस्था की गई थी. बयान के अनुसार, दिवंगत शिबू सोरेन के श्राद्ध भोज में सात से आठ लाख लोगों के शामिल होने का अनुमान था, जबकि रूपी सोरेन के श्राद्ध भोज में करीब दो से ढाई लाख लोग पहुंचे.
समिति ने कम उपस्थिति के दो कारण बताए. पहला, कार्यक्रम के दौरान नवरात्रि का समय होना, जिसके चलते धार्मिक मान्यताओं के कारण कई लोग श्राद्ध भोज में शामिल होने से परहेज करते हैं. दूसरा, दुर्गा पूजा से पहले जमशेदपुर में भाजपा और कांग्रेस के बीच हुए विवाद के कारण भाजपा के कुछ वरिष्ठ नेताओं का कार्यक्रम में शामिल नहीं होना. समिति ने इस पर निराशा जताई.

समिति ने अपने बयान में कहा कि दुख की इस घड़ी में भी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन लोगों की समस्याएं सुनते रहे और उनके समाधान का प्रयास करते रहे. संगठन ने उनके इस व्यवहार का उल्लेख करते हुए इसे संवेदनशीलता का परिचायक बताया.
अंत में सिख समाज आंदोलन समिति और झारखंड सिख कोऑर्डिनेशन कमेटी ने वाहेगुरु के चरणों में दिवंगत रूपी सोरेन की आत्मा की शांति के लिए अरदास की. दोनों संगठनों ने कहा कि वे इस दुख की घड़ी में सोरेन परिवार के साथ हैं.

