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Thu. Oct 15th, 2026

बीमारी से परेशान परिवार ने अपनाया था ईसाई धर्म, अब पांच सदस्यों ने पारंपरिक अनुष्ठान के साथ की सरना धर्म में वापसी

चाईबासा। पश्चिमी सिंहभूम जिले के नोवामुंडी प्रखंड अंतर्गत पेटेएता गांव के बुरुसाई टोला में टुपरा पुरती ने अपनी पत्नी और तीन बच्चों के साथ पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार सरना धर्म में वापसी की। बुधवार शाम आयोजित शुद्धिकरण अनुष्ठान में ग्रामीण मुंडाओं, सामाजिक प्रतिनिधियों और आदिवासी हो समाज युवा महासभा के पदाधिकारियों की मौजूदगी रही। परिवार ने करीब चार महीने पहले बीमारी से राहत की उम्मीद में ईसाई धर्म अपनाया था। अब स्वेच्छा से अपनी मूल आदिवासी संस्कृति, परंपरा और सरना धर्म के साथ जुड़ने का निर्णय लिया।

टुपरा पुरती ने ग्रामीणों को बताया कि परिवार के सदस्य बीमारी से परेशान थे। विभिन्न पुजारियों से पूजा-पाठ कराने के बाद भी राहत नहीं मिली थी। इसी परिस्थिति में उन्होंने धर्म परिवर्तन किया था। शुद्धिकरण कार्यक्रम में टुपरा पुरती, उनकी पत्नी शंकरी पुरती (32), पुत्री सुनिका पुरती (9), बसंती पुरती (5) और एक वर्षीय पुत्र लक्ष्मण पुरती शामिल हुए। गांव के पुजारी सुखराम पुरती ने पारंपरिक विधि-विधान से अनुष्ठान संपन्न कराया। इस दौरान घर के आंगन में लाल मुर्गे की बलि देने की रस्म भी निभाई गई।
गुरुवार को आदिवासी हो समाज युवा महासभा के राष्ट्रीय महासचिव गब्बरसिंह हेम्ब्रम ने कहा कि सांस्कृतिक पहचान के संरक्षण के साथ समाज में व्याप्त डायन-प्रथा, ओझा-तंत्र और झाड़-फूंक जैसी कुरीतियों को दूर करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि बीमारी के समय पर्याप्त चिकित्सा सुविधाएं नहीं मिलने से लोग असहाय महसूस करते हैं। ऐसे में सामाजिक जागरूकता बढ़ाने और जरूरतमंदों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए संगठनों को आगे आना चाहिए।

कार्यक्रम में जगन्नाथपुर अनुमंडल अध्यक्ष बलराम लागुरी, उपाध्यक्ष पुतकर लागुरी, सदस्य राजेन्द्र हेम्ब्रम, ग्रामीण मुंडा बिरसा पुरती, लम्पाहेस्सा के मुंडा विभीषण लागुरी, डाकुवा कुंदरा अंगरिया, गंगाराम लागुरी, बिरसा लागुरी, सतारी पुरती, डुरसु पुरती, सुबोध पुरती, सीनू पुरती, तुरी पुरती, लादु पुरती, दिनेश पुरती, सोमा पुरती, लाघोराम पुरती, मानी पुरती, पालो तिरिया, सूर्यमणि पुरती, बसंती पुरती, मनीता पुरती और सोना पुरती सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे। ग्रामीणों ने परिवार को सामाजिक सहयोग देने और हो समाज की परंपराओं व आपसी एकजुटता को मजबूत करने की बात कही।

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