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*पूर्व वायुसेना योद्धा हरेंद्र मोहन भारती : तकनीकी दक्षता और खेल प्रतिभा का संगम* *20 वर्षों तक भारतीय वायुसेना में दी सेवा, रडार-सिग्नल यूनिट में निभाई तकनीकी जिम्मेदारी; सर्विसेज स्पोर्ट्स में वायुसेना की टेनिस टीम का किया प्रतिनिधित्व*

जमशेदपुर।भारतीय वायुसेना केवल देश की हवाई सीमाओं की सुरक्षा करने वाला संगठन नहीं है, बल्कि यह अनुशासन, तकनीकी दक्षता, शारीरिक क्षमता और राष्ट्रसेवा की भावना को जीवन का हिस्सा बनाने वाली संस्था भी है। इसी गौरवशाली परंपरा से जुड़े रहे पूर्व वायुसेना योद्धा हरेंद्र मोहन भारती ने दो दशकों तक भारतीय वायुसेना में अपनी सेवाएं देकर राष्ट्र की सुरक्षा में योगदान दिया। वायुसेना में उन्होंने कॉरपोरल के पद पर कार्य किया और तकनीकी क्षेत्र में अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन किया।हरेंद्र मोहन भारती ने 3 अगस्त 1993 को भारतीय वायुसेना में अपने सैन्य जीवन की शुरुआत की। तकनीकी ट्रेड में रहते हुए उन्होंने रडार और सिग्नल यूनिट से संबंधित जिम्मेदारियों पर कार्य किया। वायुसेना की संचालन व्यवस्था में रडार और संचार प्रणालियां अत्यंत महत्वपूर्ण होती हैं। इस क्षेत्र में कार्य करने के लिए तकनीकी समझ, सतर्कता, अनुशासन और जिम्मेदारी की आवश्यकता होती है। भारती ने अपने सेवाकाल में इन दायित्वों को निष्ठा के साथ निभाया।

उनके सैन्य जीवन की एक उल्लेखनीय उपलब्धि खेल के क्षेत्र से भी जुड़ी रही। उन्होंने सर्विसेज स्पोर्ट्स प्रतियोगिताओं में भारतीय वायुसेना की टेनिस टीम का प्रतिनिधित्व किया। सैन्य सेवा के साथ खेलों में उत्कृष्टता हासिल करना उनके बहुआयामी व्यक्तित्व को दर्शाता है। टेनिस के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि उन्होंने मुंबई से इंटरनेशनल टेनिस फेडरेशन (ITF) लेवल-1 लॉन टेनिस कोच का प्रमाणपत्र प्राप्त किया।लगभग 20 वर्षों की सैन्य सेवा पूरी करने के बाद वे 31 अगस्त 2013 को भारतीय वायुसेना से सेवानिवृत्त हुए। उनका अंतिम कार्यस्थल 411 एयरफोर्स स्टेशन, कॉटन ग्रीन, मुंबई रहा। सेवाकाल के दौरान उनके योगदान और समर्पण के लिए उन्हें 5 वर्ष, 15 वर्ष और 20 वर्ष की सेवा पदक/सेवा मान्यताएं प्राप्त हुईं। इसके साथ ही उन्हें स्वतंत्रता की 50वीं वर्षगांठ के अवसर पर प्रदान किया गया पदक भी मिला।सेना से सेवानिवृत्ति के बाद भी वायुसेना की पहचान और उससे जुड़े संस्कार उनके जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बने हुए हैं। भारती के लिए सैन्य सेवा केवल नौकरी नहीं, बल्कि राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी निभाने का अवसर रही। वे अपने सैन्य जीवन को याद करते हुए राष्ट्र और भारतीय वायुसेना के प्रति गर्व तथा कृतज्ञता व्यक्त करते हैं।

उनका मानना है कि वायुसेना में बिताए 20 वर्षों ने उन्हें अनुशासन, जिम्मेदारी, टीम भावना और राष्ट्रसेवा का जो संस्कार दिया, वह जीवनभर उनके साथ रहेगा। सैन्य सेवा ने उन्हें न केवल एक पहचान दी, बल्कि परिवार के लिए आर्थिक सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन का आधार भी प्रदान किया।हरेंद्र मोहन भारती की यात्रा इस बात का उदाहरण है कि वर्दी की सेवा अवधि भले समाप्त हो जाए, लेकिन राष्ट्रसेवा का भाव और सैन्य अनुशासन जीवनभर साथ चलता है।

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