चाईबासा: मुंडारी भाषा को भारतीय संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल कराने की मांग को लेकर 16 अक्टूबर को पश्चिमी सिंहभूम के बंदगांव बाजार टांड़ में विशाल जनसभा का आयोजन किया जाएगा। जनसभा सुबह 11 बजे शुरू होगी। इसका आयोजन आदिवासी समिति बंदगांव की ओर से किया जा रहा है।
आयोजन समिति के अनुसार मुंडारी भाषा केवल बातचीत का माध्यम नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की संस्कृति, परंपरा, लोकगीत, लोककथाओं, सामाजिक व्यवस्था और जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण विरासत है। भाषा के माध्यम से पूर्वजों की स्मृतियां और पीढ़ियों का इतिहास जुड़ा हुआ है। इसी को ध्यान में रखते हुए मुंडारी भाषा को संवैधानिक सम्मान और राष्ट्रीय पहचान दिलाने की मांग को लेकर जनसभा आयोजित की जा रही है।
आयोजन समिति ने बताया कि जनसभा में झारखंड के विभिन्न क्षेत्रों के अलावा ओडिशा, पश्चिम बंगाल, असम, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश सहित देश के अन्य राज्यों से भी प्रतिनिधियों के शामिल होने की उम्मीद है। विभिन्न क्षेत्रों से लोगों के एक मंच पर जुटने के माध्यम से मुंडारी भाषा को 8वीं अनुसूची में शामिल करने की मांग को मजबूती से उठाया जाएगा।
समिति ने समाज के लोगों से गांव-गांव से जनसभा में शामिल होने की अपील की है। माता-बहनों, युवाओं, विद्यार्थियों, शिक्षकों, साहित्यकारों, कलाकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, भाषा प्रेमियों, बुद्धिजीवियों सहित समाज के सभी वर्गों से बड़ी संख्या में बंदगांव पहुंचने का आह्वान किया गया है।
आयोजकों का कहना है कि भाषा और संस्कृति एक-दूसरे से जुड़ी हैं। मुंडारी भाषा के संरक्षण को समाज की पहचान और आने वाली पीढ़ियों की भाषाई विरासत से जोड़ते हुए लोगों से शांतिपूर्ण तरीके से जनसभा में भाग लेने की अपील की गई है।
जनसभा के माध्यम से मुंडारी भाषा को संवैधानिक सम्मान देने और उसे 8वीं अनुसूची में शामिल करने की मांग उठाई जाएगी। आयोजन समिति ने कहा कि 16 अक्टूबर को बंदगांव की धरती से मुंडारी भाषा और संस्कृति के संरक्षण तथा संवैधानिक अधिकार की मांग को मजबूती से उठाया जाएगा।

